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shabdon mein bachi hai ummid book review in hindi

इस हफ्ते की किताब

शब्दों में बची है उम्मीद: दिल में एक उम्मीद जो बाकी है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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सुधीर विद्यार्थी की नई पुस्तक ‘शब्दों में बची है उम्मीद’ एक सफरनामा है, नामी-गिरामी हस्तियों की जिंदगी के कुछ हिस्सों को जानने का। लेखक कहते हैं कि उन्हें संस्मरण लेखन बहुत प्रिय है, क्योंकि इसके जरिए किसी के जीवन को जानने और समझने का मौका मिलता है। यह पुस्तक हिंदी-उर्दू के रचनाकारों के जिंदगी के उन हिस्सों की रंगत को पहचानने का उपक्रम भी साबित हुआ, जिसका विकास उस जमीन पर हुआ, जहां वे कुछ रचने और गढ़ने की ओर उन्मुख भी हुए। जैसे अपने समय में रूढ़ियों, कुरीतियों और अंधविश्वासों के विरुद्ध इस्मत चुगताई संघर्षरत रहीं। जैसे निरंकार देव सेवक की धरती पर एक समय कविता और भारतीय राजनीति में विचार का एक समृद्ध दुनिया बस गई थी। हरिवंश राय बच्चन जब अपनी पत्नी के साथ एक दुनिाया बसा रहे थे और उनकी कविताओं की जमीन एक नया रूप ग्रहण कर रही थी। इसी तरह अन्य रचनाकारों के संघर्ष भी इसमें शामिल हैं। भाषा सरल और रोचक है। 

किताब- शब्दों में बची है उम्मीद
लेखक- सुधीर विद्यार्थी
प्रकाशक- नयी किताब प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य- 300 रुपये

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