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samne se mere book review

इस हफ्ते की किताब

सामने से मेरे: एक नई दुनिया में कुछ नई उम्मीदों के साथ

मनोरंजन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

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‘सामने से मेरे’ में कवि चंद्रेश्वर ने बड़े ही सहज ढंग से आम जिंदगी की बात की है। एक कविता 'राह, वक्त और जिंदगी' देखें- “राह कटती है, चलते रहने से, वक्त कटता है, कुछ करने से, खाली बैठना, वक्त खाली, खोखला बना देता है, जिंदगी को!” 
कवि की भाषा अपनी सी लगती ह,ै क्योंकि बिंब रोजमर्रा की जिंदगी से आए हैं और समस्याएं भी आम जिंदगी की ही हैं। कई बार कविताओं में छिपा व्यंग्य गहराई तक उतर जाता है।
संग्रह की हर एक कविता अपनी दुनिया खुद रचती है और चंद्रेश्वर उस दुनिया से हमें लेकर चलते हैं, जहां कुछ कविताएं उनके परिवार के लिए हैं और कुछ मित्रों के लिए। कविताओं के जरिए रेलवे प्लेटफॉर्म, आम जनजीवन और सड़कों की धूल-धक्कड़ के बीच से निकलकर 
जब हम क्रिकेट की पिच और मोबाइल फोन तक पहुंचते हैं, तब तक एक नई दुनिया के हम हो चुके होते हैं।

कवि- चंद्रेश्वर
प्रकाशक- रश्मि प्रकाशन, 
लखनऊ
मूल्य- 99 रुपये
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