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पूछोगे तो जानोगे: सच के पीछे का सच

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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राजकुमार कुम्भज हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। अपनी कविताओं से उन्होंने हमेशा ही एक नया जोश लोगों के दिलों में भरा। उनकी कविताओं का नया संग्रह 'पूछोगे तो जानोगे' ऐसे ही जोश से भरा है। इनमें प्यार की मधुर कल्पनाएं हैं और सुनहरी यादें भी हैं। बाग-बगीचे भी हैं। और कुछ पूछे या छूटे गए सवाल भी हैं। यह संग्रह कई परतों को खोलते हुए दिल में बसता चला जाता है। अपनी कविताओं के माध्यम से वह पाठक से सवाल करने को कहते हैं। किसी चीज को जानने के लिए उसकी गहराई तक पहुंचने की जिज्ञासा को इन कविताओं के माध्यम से समझा जा सकता है। और सबसे बड़ी बात यह कि इस कवि के यहां जो शब्द आपको मिलेंगे, वे अपने से लगेंगे, क्योंकि आयातित विचारों पर इनकी कविता खड़ी नहींं दिखती।


किताब- पूछोगे तो जानोगे
कवि- राजकुमार कुम्भज
प्रकाशक- कृष्णादि पब्लिकेशन,
नई दिल्ली
मूल्य- 100 रुपये

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