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keshava a magnificent obsession book review in hindi

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केशवा: ए मैग्नीफीसेंट ऑब्सेशन: श्रीकृष्ण और उनके व्यक्तित्व के वैभव पर रोचक भाष्य

सुनील मिश्र

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सुपरिचित फिल्म पत्रकार, वरिष्ठ सम्पादिका भावना सोमैया का सिनेमा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है। सिनेमा के साथ ही आध्यात्मिक एवं कला के विषयों एवं दूसरे सर्जनात्मक माध्यमों पर वे विश्लेषणात्मक लिखती रहीं हैं। अभी कुछ समय पहले ही अंग्रेजी में उनकी एक किताब ‘केशवा: ए मैग्नीफीसेंट आॅब्सेशन’ आई है, जो श्रीकृष्ण के भिन्न-भिन्न नामों एवं भावों को कथावतारों के आधार पर एक अलग सी सुरुचिपूर्ण व्याख्या के साथ पढ़ने का अवसर प्रदान करती है।  


सृष्टि का कण-कण, तृण-तृण श्रीकृष्ण में समाया है और वे स्वयं कण-कण और तृण-तृण से उसी अभिप्राय से संबद्ध हैं। पुस्तक में अनुभूति की इस अलौकिकता को बहुत ही सुंदर कल्पनाशीलता के साथ व्यक्त किया गया है कि जो उनकी भक्ति और भव्य-दिव्य स्वरूप पर मुग्ध हैं, वह शरद पूर्णिमा के शीतल पर्व पर सहस्रों गोपियों के संग उनको महारास रचाते देखते हैं। भावना सोमैया इस सूक्ष्म भाव के पीछे अनुभूतिजन्य आस्था को बहुत ही सहजता और सम्प्रेषण तरीके से रेखांकित करती हैं। लेखिका अपनी भाषा में मूल कृति के अनुभूत तत्वों को इस तरह से व्यक्त करती हैं कि वह सुरुचिपूर्ण पठनीय अनुभव बन जाता है। लेखिका ने वेद, पुराण, भगवद्गीता और विभिन्न धर्म-ग्रंथों के आधार पर श्रीकृष्ण की मनोहारी छवि का दिव्य उद्घाटन किया है। श्रीकृष्ण के प्रति आसक्त और मुग्ध भम्र किस प्रकार उनमें सर्वस्व देखकर भाव विभोर होते हैं, यह सूक्ष्म मानवीय तत्व को वे अनुभवों की अपनी संवेदना से बूझकर लिखती हैं। केशव नाम अतिसुन्दर है, मैं ही परमात्मा, मैं ही आत्मा, मेरी ही प्रतिरूप से आत्मा का उद्भव और आत्मा के रूप में मैं ही अजर, अमर, अनादि और अनंत हूं यह सम्प्रेषण विचार और विस्तार के अनन्य लोक में ले जाता है। गीता में श्रीकृष्ण का कालजयी कथन है, आत्मा को न कोई शस्त्र काट सकता है और न अग्नि उसे जला सकती है। जल उसे भिगो नहीं सकता, हवा उसे सुखा नहीं सकती। ‘केशवा’ को पढ़ते हुए पाठक इस अनुभूति के साथ ही चलता है।

श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व में शोभायमान और प्रकृति के आठ अनूठे विस्मयों मयूर पंख, बांसुरी, शंख, कमल पुड्ढ, कामधेनु, पावन तुलसी, कदम्ब और पीपल वृक्ष का संयोजन दिव्य केशव से कब और किस प्रकार हुआ, शास्त्रों के अनुसार इसका रोचक वर्णन मर्मस्पर्शी है। अंग्रेजी में होते हुए भी लेखिका ने उसे सहज और अनुभवसाध्य बनाने के लिए सहज भाषा अपने सुदीर्घ रचनात्मक अनुभवों के आधार पर की है। यह पुस्तक केशव के रूप में श्रीकृष्ण के एक बड़े औरा को सधे हुए विवेक के साथ देखने और आभास करने की दृष्टि से पठनीय है।

किताब - केशवा: ए मैग्नीफीसेंट ऑब्सेशन
लेखिका- भावना सोमैया 
प्रकाशक- फिंगरप्रिंट बिलीफ, 
नई दिल्ली
मूल्य- 299 रुपये

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