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Haseenabad book review in hindi

इस हफ्ते की किताब

हसीनाबाद: गुमनाम बस्ती की बदनाम दास्तां

मनोरंजन डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली

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इस उपन्यास के शीर्षक को पढ़कर यह भ्रम होना लाजिमी है कि यह एक स्त्री की दशा-दुर्दशा पर आधारित है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह उपन्यास राजनीतिक पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। यह उपन्यास एक गांव की स्त्री का सतह से ऊपर उठने का स्वप्न है। इसमें एक बस्ती में रहने वाली सुंदरी की, अपनी बेटी गोलमी के भविष्य को बचाने की जद्दोजहद है। उसकी बेटी प्रसिद्ध लोक-नर्तकी बनकर राजनीति में पहुंच तो जाती है, लेकिन उसके जीवन का संघर्ष निरंतर चलता रहता है। इसमें राजनीति के टेढ़े-मेढ़े रास्ते हैं, तो प्रेम की कठिन डगर भी है और संवेदनाओं की उलझने भी हैं। अनावश्यक खींचतान के बिना विषय का खूबसूरत चित्रण है। उपन्यास की भाषा प्रभावी है। 

किताब-हसीनाबाद
लेखिका- गीताश्री
प्रकाशक- वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य 250 रुपये 

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