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gandhi's delhi book review in hindi

इस हफ्ते की किताब

गांधी'ज देल्ही: दिल्ली में गांधी

- कल्लोल चक्रवर्ती

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लेखक ने दिल्ली में बापू से जुड़ी तमाम चीजों का जिक्र किया है। वरिष्ठ पत्रकार विवेक शुक्ला की यह किताब अगर अलग से ध्यान खींचती है, तो इसलिए कि यह गांधी के दिल्ली से रिश्ते पर केंद्रित है। 


महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्तित्व हैं, जो आज भी हमें प्रभावित करते हैं और प्रासंगिक हैं। चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने पर पिछले दिनों अरविंद मोहन, पुष्यमित्र और पीके शुक्ला की किताबें आईं, तो दिग्गज इतिहासकार रामचंद्र गुहा की चर्चित किताब 'गांधी : द ईयर्स दैट चेंज द वर्ल्ड (1914-1948)' भी हाल में आई है। इन सबके बीच वरिष्ठ पत्रकार विवेक शुक्ला की किताब ‘गांधी’ज देल्ही’ अगर अलग से ध्यान खींचती है, तो इसलिए कि यह गांधी के दिल्ली से रिश्ते पर केंद्रित है। गौरतलब है कि दिल्ली के आधुनिक इतिहास से जुड़े विविध और व्यापक तथ्यों को बेहद दिलचस्पी के साथ उजागर करने के कारण विवेक शुक्ला की एक खास पहचान बनी है। दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद अपने राजनीतिक गुरु गोपालकृष्ण गोखले की सलाह पर गांधी ने पूरे भारत का दौरा शुरू किया। उसी दौरान सेंट स्टीफंस कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. सुशील कुमार रुद्र के अनुरोध पर गांधी पहली बार 12 अप्रैल, 1915 को दिल्ली आए। प्रो. रुद्र ने सी.एफ.एंड्र्यूज के जरिए, जो उसी कॉलेज में पढ़ाते थे और गांधी के मित्र थे, गांधी से संपर्क किया था। पहली दिल्ली यात्रा में वह प्रो. रुद्र के यहां रुके। उन्होंने कॉलेज के प्राध्यापकों और छात्रों से मुलाकात की, और अगले दिन बल्लीमारान में हकीम अजमल खान से मिलने गए। उसी दौरान उन्होंने कुतुब मीनार और लाल किला देखा, फिर वृंदावन चले गए। बाद के दिनों में दिल्ली में बापू दरियागंज में मुख्तार अहमद अंसारी के यहां रुके, वाल्मीकि बस्ती में लंबा समय गुजारा, और अंत में बिड़ला हाउस में रहे।  

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लेखक ने दिल्ली में बापू से जुड़ी तमाम चीजों का जिक्र किया है।

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