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challenges of governance book review in hindi

इस हफ्ते की किताब

चैलेंजेस ऑफ गवर्नेंस, एन इनसाइडर्स व्यू - व्यवस्था भीतर से एक नज़रिया

- सुदीप ठाकुर

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पूर्व कैबिनेट सचिव की यह किताब यूपीए सरकार के दौरान कैग की रिपोर्ट्स पर सवाल उठाती है।

राजनेताओं और नौकरशाहों में फर्क यह होता है कि सरकारी फैसलों और उसके प्रभावों को लेकर नेताओं के पास संसद से लेकर विधानसभा तक अपने बचाव के मंच उपलब्ध होते हैं, लेकिन नौकरशाहों को यह सुविधा प्राप्त नहीं होती। लिहाजा कई बार अहम नीतिगत फैसलों पर उनकी राय के बारे में पता नहीं चलता। अलबत्ता उनके पास एक विकल्प यह जरूर होता है कि वह सेवानिवृत्ति के बाद कोई किताब लिखकर अपना पक्ष जाहिर करें।

यूपीए के कार्यकाल के दौरान 2004 से 2007 तक कैबिनेट सचिव रहे पद्मभूषण से सम्मानित बी के चतुर्वेदी ने अपनी किताब चैलेंजेस ऑफ गवर्नेंस, ए इनसाइडर्स व्यू में अपने लंबे प्रशासनिक सफर के अनुभवों और वाकयों को समेटा है। यों तो उन्होंने अपना करियर आजमगढ़ के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के रूप में शुरू किया था, लेकिन बाद में उन्हें लखनऊ में राज्य सरकार के सचिवालय और फिर दिल्ली में विभिन्न मंत्रालयों में सचिव के रूप में काम करने का अवसर भी मिला।

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