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Beautiful ghazal of makhdoom

काव्य चर्चा

मख़दूम की महकती ग़ज़लों की रानाई...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मख़दूम दक्षिण भारत में पैदा हुए उर्दू के सबसे मक़बूल शायर कहे जाते हैं। वो एक ऐसे प्रगतिशील शायर थे जो सागर जितने गहरे थे और किसी पर्वत जितने ऊंचे भी। उन्होंने हैदराबाद के प्रगतिशील संघ की स्थापना की है। 'बिसात-ए-रक़्स' के लिये उन्हें 1969 में साहित्य अकादमी पुरुस्कार मिला था, उन्होंने बाज़ार और ग़मन जैसी फ़िल्मों में गाने भी लिखे हैं। मख़दूम एक हंसमुख शायर थे और कई दफ़ा अपना ही मज़ाक बना दिया करते थे। उनकी ग़ज़लों और नज़्मों से किसी युद्ध क्षेत्र का बिगुल भी बजाया जा सकता है तो बहारों में राग भी गाया जा सकता है। 

पढ़िए उनके लिखे कुछ सुख़न
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फिर छिड़ी रात बात फूलों की...

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