आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Azeez Filmi Nagme ›   baharon phool barsao here presented by amarujala kavya
baharon phool barsao here presented by amarujala kavya

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

इश्क़ की बहारें आज भी महबूब पर फूल बरसा रही हैं...

दीपाली अग्रवाल, अमर उजाला काव्य डेस्क- नई दिल्ली

1101 Views
बोल तेरी मोहब्बत में मैं क्या ले आऊं, चांद ले आऊं या तारे तोड़ लाऊं....

एक प्रेमी अक्सर अपनी प्रेयसी से ऐसे दावे करता है लेकिन शिद्दत तब है जब सबसे सुंदर प्रकृति से अपनी महबूबा के श्रृंगार का निवेदन किया जाए। ऐसा ही निवेदन 1966 में रिलीज फ़िल्म 'सूरज' के एक गीत में किया गया है। महबूब के इस्तक़बाल की हर कुदरती आस को यहां शिद्दत से बयां किया गया है। 

गीत 'बहारों फूल बरसाओ...हसरत जयपुरी ने लिखा है और गायकी के सरताज मोहम्मद रफ़ी ने इसे गाया है। सुर शंकर-जयकिशन ने साधे हैं। यह राजेन्द्र कुमार और वैजयन्तीमाला पर फ़िल्माया गया है। जब यह संयोग प्रकृति से किसी योग की ग़ुज़ारिश करेगा तो निस्सीम समय के लिए असर छोड़ेगा।

 इसी का प्रमाण है कि आज भी विवाह-समारोह में जब दुल्हन का प्रवेश होता है तो जीवन मंच पर खड़े दूल्हे की भावनाओं को इसी गाने के साथ शब्द दिए जाते हैं। 
आगे पढ़ें

ओ लाली फूल की मेहंदी लगा इन गोरे हाथों में....

सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!