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रिम्स में मच्छरों और कुत्तों के कारण लालू को नींद नहीं आती, वार्ड बदला गया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Updated Thu, 06 Sep 2018 08:40 AM IST
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Lalu Prasad in RIMS
Lalu Prasad in RIMS - फोटो : ANI

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चारा घोटाला में रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव का रांची इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में इलाज जारी है। बुधवार शाम उन्हें रिम्स सुपर स्पेशियलिटी विंग से हटा कर बगल के पेइंग वार्ड में भर्ती करा दिया गया। अब उन्हें हर रोज 1000 रुपये वार्ड का किराया देना होगा। लालू प्रसाद के अनुरोध के और जेल प्रशासन की इजाजत के बाद रिम्स प्रबंधन ने लालू यादव को पेईंग वार्ड में शिफ्ट किया गया। उनको पेईंग वार्ड के कमरा संख्या 11 में शिफ्ट किया गया है।  
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इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बुधवार को लालू प्रसाद के स्वास्थ्य की जांच की जिसमें शुगर लेवर 174 पाया गया।  ब्लड प्रेशर सामान्य मिला है। बता दें कि लालू प्रसाद यादव ने 30 अगस्त को रांची की विशेष सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण किया था जिसके बाद उन्हें बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया। लेकिन लालू के खराब स्वास्थ्य के मद्देनजर उन्हें इलाज के लिए रिम्स में भर्ती कराया गया था। लालू को रिम्स के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के वार्ड में रखा गया था जहां पर उनका इलाज चल रहा था। 


लेकिन लालू प्रसाद ने सुपर स्पेशियलिटी विंग की गैलरी में अन्य मरीजों की आवाजाही और शोर-शराबे के कारण पेईंग वार्ड में स्थानांतरित किए जाने का आग्रह किया था। आग्रह पत्र में लालू ने कहा कि वह टहल नहीं पा रहे थे। शारीरिक गतिविधि नहीं होने के कारण और अच्छी नींद नहीं आने के कारण उन्हें स्ट्रेस हो गया था। इसी वजह से उनका शुगर लेवल बढ़ जा रहा था। पेईंग वार्ड में शिफ्ट होने के बाद वह गैलरी में टहल भी पाएंगे। 

हालांकि अस्पताल के अन्य लोगों के मुताबिक रिम्स के सुपर स्पेशियलिटी विंग में मच्छरों की समस्या है और साथ ही रात भर कुत्तों के भौंकने से भी मरीजों को परेशानी होती है। वहां काफी गंदगी भी है जिससे मरीजों के इंफेक्शन का खतरा रहता है। पेइंग वार्ड में शिफ्ट होने के बाद अब वह लालू प्रसाद को राहत मिलेगी  जो पूरी तरीके से वातानुकूलित है। 

लालू प्रसाद के मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक इसीजी में एट्रॉपिक (बीच-बीच में रुकावट) की समस्या आई है। लालू प्रसाद का इलाज कर रहे यूनिट इंचार्ज डॉ उमेश प्रसाद ने कहा कि संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए एंटीबॉयोटिक दवाएं शुरू कर दी गई हैं। लेकिन एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के डॉ. विजय ने एट्रॉपिक के लिए अभी कोई दवा शुरू नहीं करने की सलाह दी है। गौरतलब है कि डॉ उमेश प्रसाद ने एट्रॉपिक की समस्या आने पर ई-मेल के जरिए इसीजी और इको की रिपोर्ट डॉ. विजय को मुंबई भेजी थी। जिसके बाद उन्होंने फोन पर बात भी की थी। 

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