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9 अगस्त 2020

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Digital Edition

जम्मू-कश्मीरः कुलगाम मे आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ जारी

Encounter Encounter

बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होते देखा तो टीचर बन गए इंजीनियर मुनीर

कोरोना के कारण देशभर में शिक्षण संस्थान बंद होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जम्मू-कश्मीर में टूजी इंटरनेट के कारण ऑनलाइन भी पढ़ाई नहीं हो पाती। ऐसे में बच्चों को पढ़ाई के नुकसान से बचाने के लिए श्रीनगर के एक इंजीनियर ने ओपन क्लास लगानी शुरू कर दी। अब शिक्षक बन स्थानीय बच्चों को गणित और भौतिक विज्ञान की मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं।

पेशे से सिविल इंजीनियर मुनीर आलम 80 से ज्यादा बच्चों के लिए नई उम्मीद बने हुए हैं। मुनीर वर्ष 2004 में श्रीनगर के एनआईटी से इंजीनियरिंग पास आउट हैं। वह रोज सुबह पांच बजे ईदगाह ग्राउंड पहुंचते हैं। यहां सुबह के बैच में करीब 40 बच्चे पढ़ने आते हैं। 

मुनीर ने बताया कि अगर किसी को अपनी कौम के बच्चों के भविष्य का दर्द होगा तो उसे अपनी नींद कुर्बान करनी ही पड़ेगी। मुनीर कहते हैं कि बच्चे दो किस्म के नुकसान से गुजर रहे हैं। 

एक मानसिक तनाव और दूसरा पढ़ाई का नुकसान। अगर इस समय उन्हें सही राह पर नहीं लाया गया तो वो किसी गलत राह की ओर निकल पड़ेंगे और कल उन पर गलत टैग लगेगा।

ऑनलाइन क्लास से कई गुना बेहतर है मुनीर सर की क्लास : 
इस क्लास में पढ़ने वाली छात्रा साईमा हमीद ने कहा कि जो ऑनलाइन क्लास कराई जा रही है, उससे मानसिक तनाव होता है। एक तो इंटरनेट ढंग से नहीं चलता, ऊपर से मोबाइल सामने रहने से आंखों में भी परेशानी होती है। इससे तो कई गुना बेहतर है मुनीर सर की क्लास।

अच्छा लगता है बच्चों को पढ़ाना
मुनीर ने बताया कि ओपन एयर क्लास में एक तो बच्चा घर से बाहर निकल पा रहा है और दूसरों से मिलजुल रहा है। इससे उसका मानसिक तनाव कम हो रहा है। बताया कि बच्चों को पढ़ाना उनका शौक है और वो पिछले 20 वर्षों से कई हजार बच्चों को गणित की शिक्षा दे चुके हैं। कहा कि गाइडलाइन का पूरा पालन किया जा रहा है। बच्चे अपने बैठने के लिए कुर्सी या मैट खुद ही लाते हैं।

(फेसबुक ने इस शृंखला के लिए हमारे साथ भागीदारी की है, लेकिन इस कड़ी में प्रकाशित होने वाले समाचारों पर कोई संपादकीय नियंत्रण नहीं लगाया है।)
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उपराज्यपाल सिन्हा के एजेंडे में विकास और विश्वास, बोले- बर्दाश्त नहीं होगा कोई भी देश विरोधी काम

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कार्यकाल के पहले ही दिन प्रशासन के समक्ष अपना एजेंडा स्पष्ट कर दिया है। साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और देशविरोधी गतिविधियों पर प्रशासन जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए। इसमें किसी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूख वाला क्यों न हो। युवाओं में खासकर विश्वास बहाली करनी होगी। विकास ही सरकार का मूल मंत्र होगा। हर गांव तथा हर घर तक प्रशासन पहुंचे ताकि लोगों को यह अहसास हो कि सरकार उनके दरवाजे तक चलकर पहुंची है।

शपथ ग्रहण करने के बाद शुक्रवार को अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकों में उन्होंने कामकाज को लेकर पूरा रोडमैप रखा। संदेश दिया कि भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों-कर्मचारियों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। लिहाजा, वे अपने आचरण में सुधार कर लें। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। भ्रष्टाचारी हर हाल में नपेंगे। लोगों के सामने प्रशासन का चेहरा बिल्कुल साफ नजर आना चाहिए। पारदर्शी तरीके से हर काम को समय पर पूरा करना होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश विरोधी गतिविधियां भी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होंगी। यह नहीं चलेगा कि सरकारी नौकरी में रहते लोगों को भड़काया जाए। अलगाववाद को हवा दी जाए। इसे भूल जाने में ही भलाई है। राष्ट्रीय हित के इतर कोई भी काम अब जम्मू-कश्मीर में नहीं चलने वाला है।

उन्होंने यह भी कहा कि अफसरों को लोगों के दरवाजे तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए तैयार रहना होगा। इसके लिए तंत्र विकसित करने होंगे। अवाम को यह अहसास होना चाहिए कि चुनी हुई सरकार न होने के बाद भी उनके काम रुकने वाले नहीं हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखनी होगी। किसी को बेवजह परेशान न किया जाए। जिसने कोई जुर्म किया हो उसे छोड़ा भी न जाए।


हर वर्ग तथा हर क्षेत्र के विकास का दिया मंत्र
उन्होंने पूरे जम्मू-कश्मीर में हर वर्ग तथा हर क्षेत्र के विकास का मूल मंत्र दिया है। इसमें दूरदराज के इलाकों को नजरअंदाज न करने पर जोर रहा। चाहे पहाड़ी इलाका हो, पर वहां लोगों के मसले हल होने चाहिए। किसी को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े।

नए जम्मू-कश्मीर में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। एक साल में जितने भी काम हुए हैं उन्हें और गति दी जाएगी। धीरे-धीरे ऐसा माहौल पैदा किया जाएगा कि लोगों को यह लगने लगेगा कि सरकार ने उन्हें अपनाया है। उनकी हर परेशानी-मुश्किलों को उसने अपना समझा है।- मनोज सिन्हा, उपराज्यपाल


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प्रशासन के दावों और हकीकत की चीनी मांझे ने खोली पोल, एक व्यक्ति की मौत ने खड़े किए कई सवाल

पाबंदी के बावजूद शहर में खुलेआम इस्तेमाल हो रहे चीनी मांझे ने शहर में एक व्यक्ति की जान ले ली। शुक्रवार शाम को कासिम नगर क्षेत्र में स्कूटी से जा रहे 40 वर्षीय सिकंदर अली खान का चीनी मांझे से गला कट गया। खून से लथपथ सिकंदर को स्थानीय लोग मेडिकल कॉलेज जम्मू ले गए। लेकिन अत्यधिक खून बहने से सिकंदर की मौत हो गई। स्कूटी पर एक बच्चा और महिला भी सवार थी, जो बाल-बाल बच गए। वहीं इस घटना से परिजनों और स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ रोष है।

बाहु फोर्ट पुलिस थाने से मिली जानकारी के अनुसार सिकंदर अली खान पुत्र निसार हुसैन निवासी नरवाल बाला राजीव नगर स्कूटी पर एक बच्चे और महिला को लेकर जा रहे थे। शाम को कासिम नगर इलाके में अचानक उनके गले में चीनी मांझा फंस गया। इससे उनका गला कट गया।

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पुलिस को सूचना मिलते ही पीसीआर से वाहन भेजा गया, लेकिन तब तक सिकंदर को लोग जीएमसी ले जा चुके थे। वहां डॉक्टरों ने सिकंदर को मृत लाया घोषित कर दिया। वहीं हैरानी वाली बात ये है कि चीनी मांझे पर प्रतिबंध है लेकिन बाजारों में यह धड़ल्ले से बिक रहा है। इसके इस्तेमाल से हंसता खेलता परिवार बिखर गया है। इर हादसे के लिए मृतक के परिजन प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

दो माह, ढाई साल की बेटियाें से छिन गया पिता का साया
मृतक के एक रिश्तेदार ने बताया कि सिकंदर कैटरिंग से घर का खर्च चलाते थे। उनकी दो बेटियां हैं। जिनकी उम्र क्रमशः दो माह और ढाई साल है। घर में दो बहनें और एक भाई है जिनकी शादी नहीं हुई है।

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रोते-बिलखते मृतक के परिजन

श्रीनगर के लापता युवक साकिब मंजूर डार के आतंकी बनने की चर्चा, वायरल ऑडियो से हुआ ये खुलासा

श्रीनगर में ओल्ड बरजुल्ला इलाके से पांच अगस्त से लापता युवक साकिब मंजूर डार के आतंकी बनने की चर्चा है। शुक्रवार देर शाम वायरल हुए एक ऑडियो संदेश में खुद को साकिब बता रहे युवक ने आतंक की राह थामने की बात मानी। यह ऑडियो परिवार की तरफ से उसे घर लौट आने की अपील वाले वीडियो संदेश के बाद सामने आया है। दूसरी तरफ पुलिस साकिब के आतंकवाद में शामिल होने की बात को नकार रही है।

श्रीनगर के ओल्ड बरजुल्ला इलाके का साकिब मंजूर डार पुत्र मंजूर अहमद डार पांच अगस्त से घर से लापता है। शुक्रवार सुबह उसके परिजनों का एक वीडियो वायरल हुआ। दो मिनट 50 सेकेंड के इस वीडियो में साकिब की मां, उसकी बहन और परिवार के कुछ और सदस्य रोते हुए उससे घर लौट आने की अपील करते दिखाई दे रहे हैं। मां कह रही है कि उसके चार ऑपरेशन हुए हैं, कृपा करके घर लौट आओ। अगर उसने या उसके पिता ने उसे कुछ बोला है तो माफी मांगती हूं। इतना ही नहीं रोती हुई छोटी बहन ने भी हाथ जोड़कर उसे घर लौट आने की अपील की। वह कह रही है कि तू मेरा इकलौता भाई है और तेरे बिना मैं कुछ नहीं।

वहीं इस बीच देर शाम साकिब का बताया जा रहा एक ऑडियो संदेश वायरल हुआ। इसमें खुद को साकिब बता रहा युवक जिहाद का रास्ता चुनने की बात कह रहा है। कह रहा है कि मैं अपने घर वालों से कहना चाहता हूं कि वो मुझे ढूंढने की कोशिश न करें। मैं महफूज हूं।

बता दें, श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र रणबीरगढ़ में 26 जुलाई को मुठभेड़ में लश्कर के कमांडर इशफाक रशीद खान के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस के कश्मीर रेंज के आईजीपी विजय कुमार ने दावा किया था कि अब श्रीनगर का कोई भी युवा आतंकवादी नहीं है।

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जम्मू-कश्मीरः पंच-सरपंचों के रिक्त पदों पर उपचुनाव कोरोना से राहत के बाद

जम्मू-कश्मीर में खाली पड़े पंच-सरपंचों के 12600 पदों पर उप चुनाव कोरोना संक्रमण की स्थिति बेहतर होते ही जल्द से जल्द करा लिए जाएंगे। यह बात मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कही। प्रदेश में पंच-सरपंचों के कुल 40000 पद हैं। अधिकांश रिक्त पद कश्मीर घाटी में हैं।

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मुख्य सचिव ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वास्तव में हमारी योजना फरवरी-मार्च तक उपचुनाव कराने की थी, लेकिन कोरोना वायरस ने पूरी प्रक्रिया में देरी कर दी। कहा कि वर्ष 2018 में संपन्न पंचायत चुनाव एक बेहतर अनुभव रहा। चुनाव के बाद पंचायतों में धन प्रवाह हो रहा है। लोगों को लाभ पहुंचाने वाले विकास कार्य कराए गए हैं।

एक आधिकारिक अनुमान के अनुसार, कश्मीर में 11,457 पंच और 887 सरपंच सीटें खाली हैं, जबकि जम्मू संभाग में 182 पंच और 124 सरपंच सीटें खाली हैं। भविष्य में होने वाले पंचायत उपचुनाव जम्म-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहला चुनाव होगा।

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मैं जिस दिन बिना सुरक्षा पुलवामा जा सका, उस दिन कह सकेंगे...शांति लौट आईः बीवीआर सुब्रह्मण्यम

जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक टूटा हुआ राज्य था। यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर से जब पिछले वर्ष अनुच्छेद 370 हटाने के बाद विभिन्न नेताओं को नजरबंद किया गया तो प्रदेश के किसी भी नागरिक ने दुख नहीं जताया। यहां के लोगों को अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद मिलने वाले संपूर्ण लाभ हासिल करने के लिए अभी धैर्य रखना होगा। क्योंकि पांच अगस्त 2019 को की गई कार्रवाई के बाद अभी तक पूरी तरह सकारात्मक पहल नहीं हो पाई है।

सुब्रह्मण्यम शुक्रवार को पत्रकारों के साथ बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भ्रष्टाचार और कुप्रशासन के कारण यहां का सिस्टम अंदर से पूरी तरह ढह गया था। जून 2018 में यहां आने से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और अपने नए काम के लिए मार्ग दर्शन मांगा। प्रधानमंत्री ने कहा, जाओ.. प्रशासन को दुरुस्त करो, उसका पुनर्निर्माण करो और स्थानीय लोगों को उनका बेशकीमती हक उन्हें सौंपो। यहा अधूरी पड़ी योजनाओं की लंबी फेहरिस्त थी। भूमि अधिग्रहण एक बड़ा घोटाला था।

यहां के चिकित्सक मिडिल-ईस्ट में नौकरियां कर रहे थे और तनख्वाह जम्मू-कश्मीर से ले रहे थे। ऐसा इसलिए था क्योंकि राज्य में निगरानी का कोई सिस्टम ही नहीं था। जेके बैंक का सीएमडी घोटालेबाज नंबर एक था। बीस परिवारों या अधिकतम 30 परिवारों को जेके बैंक ने दूध पिलाया। कोई जवाबदेही नहीं थी। जम्मू-कश्मीर के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम विधानसभा को अपनी रिपोर्ट सौंपते हैं। अन्य राज्यों में इस प्रकार के सार्वजनिक उपक्रम आरटीआई, सीवीसी और केंद्रीय सतर्कता आयोग के अंतर्गत आते हैं लेकिन जेके बैंक किसी प्रति जवाबदेह नहीं था। जम्मू-कश्मीर एक टूटा हुआ राज्य था। हम इसका पुनर्निर्माण कर रहे हैं।

जब उनसे पूछा गया कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के एक साल बाद लोगों को कैसा लग रहा है तो उन्होंने कहा कि आम आदमी को इससे कोई दिक्कत नहीं है, उन्हें उम्मीद है कि नौकरियां मिलेंगी, विकास होगा, हम उसी रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बहुत सारे बदलाव हुए हैं। केवल 15 दिनों में तीन लाख कर्मचारियों का पृथकीकरण किया गया। हालांकि अभी जम्म-कश्मीर और लद्दाख के बीच संपत्तियों और देनदारियों के विभाजन को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।

सुब्रह्मण्यम ने कहा कि 6,500 करोड़ रुपये की परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। इसमें बारामुला में 26 वर्षों से अटका एक बाईपास का निर्माण भी शामिल है। हमने इन सभी अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 2,500 करोड़ रुपये पहले ही मंजूर कर लिए हैं।

जिस दिन मैं बिना सुरक्षा पुलवामा जा सका, उस दिन कह सकेंगे...शांति लौट आई
जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा स्थिति के बारे में पूछे जाने पर सुब्रह्मण्यम ने कहा, जिस दिन मैं बिना पुलिस स्कार्ट और पायलट सिर्फ ड्राइवर के साथ पुलवामा जा सका उस दिन हम कह सकेंगे कि जम्मू-कश्मीर में शांति लौट आई है। पुलवामा को उग्रवाद का गढ़ माना जाता है। फरवरी 2019 में पुलवामा में आतंकवादियों ने एक आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ जवानो की एक बस क उड़ा दिया था। इसमें 44 जवान शहीद हुए थे।
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विमान हादसे पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने कहा- शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदना

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने केरल विमान हादसे पर दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि दुबई से केरल आ रहे एयर इंडिया के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर अत्यंत हृदयविदारक व दुखद है। भगवान से प्रार्थना है कि दिवगंत आत्माओं को अपने चरणों में स्थान दें। घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।
 


इससे पहले शुक्रवार रात करीब 10 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इस हादसे पर दुख जताया। उन्होंने ट्वीट किया कि "कोझिकोड में हुए विमान हादसे से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने इस हादसे में अपनों को खोया है। जो लोग घायल हुए हैं वे जल्द से जल्द ठीक हों। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से इस संबंध में बात की। अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और हर तरह की संभव मदद दे रहे हैं।" केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी हादसे पर दुख जताया। उन्होंने ट्वीट कर बताया है कि एनडीआरएफ की टीम को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचने को कहा गया है।

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बता दें कि केरल के कोझिकोड में करीपुर एयरपोर्ट पर एयर इंडिया एक्सप्रेस का एक विमान शुक्रवार की शाम लैंडिंग के दौरान फिसल गया और खाई में गिर गया। हादसे में दो पायलट सहित 18 लोगों की मौत हुई है।
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