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Udhampur Bus Blast:डेटोनेटर से टाइम सेट करने वाली स्टिकी आईईडी का पहली बार इस्तेमाल, खुफिया एजेंसी भी हैरान

अजय मीनिया, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Mon, 03 Oct 2022 02:15 AM IST
सार

पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस आईईडी में ऐसा सिस्टम है कि इसे कहीं पर भी अपने साथ लेकर चले जाओ और अपने हिसाब से टाइम सेट कर लो। इससे पहले जो आईईडी आती थी, उनमें पहले से टाइम सेट होता था।

उधमपुर बस बलास्ट के बारे में जानकारी देते अधिकारी
उधमपुर बस बलास्ट के बारे में जानकारी देते अधिकारी - फोटो : संवाद
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विस्तार

उधमपुर धमाकों में कई खुलासे हुए हैं। हमलों में पहली बार ऐसी स्टिकी आईईडी का इस्तेमाल किया गया, जिसमें में 3.30 मिनट से लेकर 14 घंटे तक का टाइम सेट किया जा सकता है। इन आईईडी को एक स्टील के बॉक्स में तैयार किया गया, जिसमें आरडीएक्स लगाया गया। आमतौर पर स्टिकी बम का वजन 400 से 450 ग्राम के बीच रहता है, लेकिन इनका वजन 750 ग्राम तक रखा गया था।



अहम बात यह है कि आम स्टिकी बम में पहले से टाइम सेट होता है, जिनकी दो तारें जोड़ने के बाद एक तय समय में यह ब्लास्ट होती हैं, लेकिन उधमपुर में ब्लास्ट होने वाली आईईडी का टाइमर आतंकी असलम ने सेट किया था। इसे कैसे सेट करना है, इसके लिए आतंकी खुबैब ने एक वीडियो बनाकर भी भेजा था।


बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान से जब भी स्टिकी बम आए हैं, उनमें पहले से ही टाइम सेट होता था। इनकी दो ही तारें निकली होती थीं, जिनको जोड़ने के बाद धमाका होना था, लेकिन इस बार जो आईईडी भेजी गई। इनमें अपनी मर्जी से टाइम सेट किया जा सकता है। 

टेप उतारी और लगा दिया डेटोनेटर

आईईडी के ऊपर काली टेप लगाई गई थी। इसे उतारते ही एक डेटोनेटर लगा देना था। साथ ही इसमें बैटरी भी लगानी थी। डेटोनेटर के ऊपर सफेद रंग के 4 बटन भी हैं। इन बटन को ऊपर नीचे करने के बाद 3.30 मिनट से लेकर 14 घंटे तक की आईईडी सेट की जा सकती है। आतंकी असलम ने उधमपुर में एक्टीवेट की गई आईईडी में 7 घंटे का टाइम सेट किया था। 

क्या है मकसद इन आईईडी का

एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि इस आईईडी में ऐसा सिस्टम है कि इसे कहीं पर भी अपने साथ लेकर चले जाओ और अपने हिसाब से टाइम सेट कर लो। इससे पहले जो आईईडी आती थी, उनमें पहले से टाइम सेट होता था। इस आईईडी को कभी भी एक्टीवेट किया जा सकता है। 

पता था, फिर भी हमले के बाद ही साजिश का पता लगा

उधमपुर में ब्लास्ट होना पुलिस और खुफिया एजेंसी की कहीं न कहीं एक बड़ी चूक भी है, क्योंकि 6 महीने पहले जब 9 मार्च को उधमपुर के ही सलाथिया चौक पर हमला हुआ था। तब ही पुलिस को पता चल गया था कि डोडा का रहने वाला आतंकी खुबैब पाकिस्तान में बैठ कर उधमपुर में हमलों की साजिश रच रहा है।
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बावजूद इसके खुबैब ने सोशल मीडिया के जरिए असलम से संपर्क किया। उसे हमलों के लिए तैयार किया। एक तरफ एडीजीपी मुकेश सिंह ने दावा किया कि पिछले 6 महीने से वह पूर्व आतंकियों और इनके पुराने नेटवर्क पर नजर रख रहे हैं। दूसरी तरफ एक पूर्व आतंकी से खुबैब ने संपर्क किया।

उसे सीमा पार से आईईडी भी दे दी। आईईडी लेने के बाद उसने धमाके भी कर दिए। बावजूद इसके पुलिस और तमाम खुफिया एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी। अब जब दो हमले हो चुके हैं, तब जाकर पुलिस को पता चला कि यह माड्यूल तैयार हुआ था।

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