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श्रीनगरः सचिवालय भवन पर लगे जम्मू-कश्मीर के झंडे को उतारा गया, अब लहरा रहा है सिर्फ तिरंगा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Mon, 26 Aug 2019 01:09 AM IST
सिविल सचिवालय भवन से उतारा गया जम्मू-कश्मीर का झंडा
सिविल सचिवालय भवन से उतारा गया जम्मू-कश्मीर का झंडा - फोटो : ani
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जम्मू-कश्मीर में अब एक निशान और एक विधान पूरी तरह लागू हो गया है। रविवार को श्रीनगर में सचिवालय भवन से राज्य का झंडा हटा दिया गया। अब सभी सरकारी कार्यालयों पर केवल तिरंगा ही फहरेगा। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य का विशेष दर्जा समाप्त होने के 20 दिन बाद सचिवालय से यह झंडा हटा लिया गया। 
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रोजाना सचिवालय भवन पर तिरंगा के साथ राज्य का झंडा भी फहराया जाता था, लेकिन रविवार सुबह केवल तिरंगा ही फहराया गया। पहले माना जा रहा था कि 31 अक्तूबर को जब राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश बनने पर ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। राज्य का झंडा सात जून, 1952 को स्वीकार किया गया था। लाल रंग के झंडे में तीन सफेद पट्टियां और सफेद हल था। पट्टियां तीनों संभाग जम्मू, कश्मीर व लद्दाख का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। 

पांच अगस्त को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया था। राज्य में अशांति तथा हिंसा की आशंका को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती को हिरासत में लेने के साथ ही कई नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया। नेकां प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला समेत अलगाववादी व प्रमुख नेताओं को नजरबंद कर दिया गया। पूरी घाटी में पाबंदियां लगा दी गईं। धीरे-धीरे इसमें ढील दी गई। अब सरकार की ओर से नेकां व पीडीपी के नेताओं के साथ बातचीत कर राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की जा रही है। 

अनुच्छेद 370 हटाने के साथ ही जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है। जम्मू-कश्मीर में 114 सदस्यीय विधानसभा होगी, जहां चुनाव भी होंगे लेकिन चंडीगढ़ की तरह लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश होगा। अनुच्छेद 370 के तहत राज्य को मिले विशेष दर्जे के कारण यहां संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती थी। इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं था। इसलिए यहां राज्यपाल शासन लगता था। 

अब यह व्यवस्था खत्म हो गई है। यहां विधानसभा का कार्यकाल छह साल का होता था जबकि अन्य राज्यों में पांच साल। अब यहां भी यह व्यवस्था लागू होगी। संविधान की धारा 360 देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान भी जम्मू-कश्मीर में विशेष दर्जे के कारण लागू नहीं था। संसद को रक्षा, विदेश मामले और संचार को छोड़कर अन्य विषयों के कानून लागू कराने के लिए राज्य सरकार से अनुमोदन लेना पड़ता था। 
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क्या थी अनुच्छेद 370 की बड़ी बातें

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