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जम्मू: कश्मीर फाइल्स को प्रोपेगेंडा बताने पर कश्मीरी पंडितों ने जताया विरोध, बोले-फिल्म में दिखाई गई है सचाई

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 30 Nov 2022 01:08 PM IST
सार

‘द कश्मीर फाइल्स’ को प्रोपेगेंडा बताने वाले इस्राइली फिल्म निर्माता नदव लापिद पर कश्मीरी पंडितों का गुस्सा फूटा है। कश्मीरी पंडितों ने लापिद को तुरंत देश से बाहर निकालने की मांग की है।

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Jammu - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गोवा में आयोजित 53वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (आईएफएफआई) के समापन पर इजराइली फिल्म मेकर के द कश्मीर फाइल्स फिल्म को प्रोपेगेंडा बताए जाने से कश्मीरी पंडितों में गुस्सा फूटा है। मंगलवार को कश्मीरी पंडित समुदाय और पीएम पैकेज के कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर कड़ी आपत्ति जताई है। इजराइली फिल्म मेकर नदाव लैपिड ने फिल्म को वल्गर और प्रोपेगेंडा बताया था।



पीएम पैकेज के कर्मचारियों ने राहत आयुक्त कर्यालय के बाहर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार से आपत्ति जतानी की मांग उठाई है। कर्मचारियों ने कहा कि 200 दिनों से द कश्मीर फाइल्स फिल्म जम्मू में भी चल रही है। कर्मचारियों स्थानांतरण की मांग कर रहे है, लेकिन सरकार उसे पूरा नहीं कर रही है। घाटी में पीएम पैकेज के कर्मचारी सुरक्षित नहीं हैं। उन्हें ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बायोमीट्रिक हाजिरी को अनिवार्य करना इसका सुबूत है। इजराइली फिल्म मेकर का बयान शर्मनाक है। कर्मचारियों ने कहा कि हम उस हिंसक दौर के गवाह हैं। ऐसे में इस तरह का बयान देना उचित नहीं है।


कश्मीरी पंडितों ने की लापिद को तुरंत देश से निकालने की मांग
‘द कश्मीर फाइल्स’ को प्रोपेगेंडा बताने वाले इस्राइली फिल्म निर्माता नदव लापिद पर कश्मीरी पंडितों का गुस्सा फूटा है। कश्मीरी पंडितों ने लापिद को तुरंत देश से बाहर निकालने की मांग की है। विवेक अग्निहोत्री की फिल्म को भारत की ’श़िडलर्स लिस्ट’ कहते हुए, उन्होंने लापिद से जानना चाहा कि क्या बतौर यहूदी वह यहूदियों के नरसंहार पर आधारित अमेरिकी फिल्म के बारे में भी ऐसा ही सोचते हैं।

हिजबुल मुजाहिदीन के हमले में मारे गए प्रिंसिपल अशोक कुमार रैना के बेटे विकास रैना ने कहा, कश्मीर फाइल्स ने कश्मीरी पंडितों के पलायन पर सच्चाई को छिपाने के लिए तैयार किए गए 30 साल पुराने प्रोपेगेंडा को बेनकाब कर दिया। उन्होंने पूछा, क्या लापिद हमारा दर्द समझता है? जब मैं बच्चा था तब मैंने अपने पिता को खो दिया। मेरे पिता और उनके दो लेक्चरार के साथ बस से नीचे उतारा गया और उन पर गोलियों की बौछार कर दी गई। कश्मीर फाइल्स भारत की श़िडलर्स लिस्ट है और यह हमारा सत्य भी है। संदीप कौल ने कहा, लापिद के बयान ने घाव ताजा कर दिए।

इससे मुझे और मेरी मां को दर्द हुआ है। लापिद को ’द कश्मीर फाइल्स’ में चित्रित त्रासदी का उपहास करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। कौल के दादा राधा कृष्ण और पिता शिबन को उनके घर से बाहर खींचकर दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने मार डाला था। रविंदर, जिनके पिता को आतंकवादियों ने मार डाला था और उनके शरीर को टुकड़ों में काट दिया था, ने कहा, लापिद का ऐसी टिप्पणी करना शर्मनाक है। उन्हें माफी मांगनी चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता हूं।

पहले विस्थापित पंडितों के शिविर का दौरा करें लापिद

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना ने कहा कि फि ल्म द कश्मीर फ ाइल्स को लेकर इजराइली फि ल्म निर्देशक नदव लापिद द्वारा की गई टिप्पणी केंद्र शासित प्रदेश में जमीनी स्थिति के बारे में उनकी जानकारी की कमी दर्शाती है। उन्हें पहले जम्मू कश्मीर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के शिविरों का दौरा करना चाहिए। इस तरह की टिप्पणी की उम्मीद केवल उस व्यक्ति से की जाती है जो जमीनी स्थिति के साथ ही यह नहीं जानता कि आतंकवाद के चलते लोग कितने प्रभावित हुए हैं चाहे उनका धर्म कोई भी हो। पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद ने पिछले तीन दशकों में एक लाख लोगों की जान ली है और इसके चलते कश्मीरी पंडितों को अपने घरों से पलायन करना पड़ा। फि ल्म आतंकवाद पीड़ितों की दुर्दशा की सच्ची तस्वीर दर्शाती है।
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लापिद के चयन की जांच की मांग

लापिद की टिप्पणी की निंदा करते हुए कश्मीरी पंडित फि ल्म निमातज़ और इंडियन फि ल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक पंडित ने अंतरराष्ट्रीय जूरी के अध्यक्ष के रूप में उनके चयन की जांच की मांग की। कहा कि वह फ लस्तीन के समर्थक हैं। उनकी टिप्पणी केवल उनकी राय नहीं थी बल्कि राष्ट्रविरोधी वामपंथी उदारवादियों और शहरी नक्सलियों के गिरोह का रुख था। वह फि ल्म और इसकी तकनीकियों के बारे में बात कर सकते थे लेकिन उन्होंने एक राजनीतिज्ञ के रूप में बात की। लापिद ने कश्मीरी पंडितों की त्रासदी का मजाक उड़ाया है। वह एक ऐसी फि ल्म के बारे में बात कर रहे हैं जिसमें मेरा दर्द दिखाया गया है। इसकी निंदा करने का मतलब है कि आपने आतंकवाद को अपना समर्थन दिया है।
 

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