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जम्मू-कश्मीर से कांग्रेसी खेमे का सोनिया-राहुल के खिलाफ शंखनाद, आक्रामक होगी मुहिम

बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 28 Feb 2021 02:19 AM IST

सार

  • अब पार्टी को बचाने की मुहिम के तहत पूरे देश में सभाएं और बैठकें करने की तैयारी
  • वंशवाद के खिलाफ व आंतरिक लोकतंत्र बहाली की मुहिम को धार देने की कवायद
  • पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद जी - 23 और होगा आक्रामक 
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gulam nabi aajad - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

सोनिया-राहुल गांधी के खिलाफ मुखर और पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की बहाली का मोर्चा संभाल रहे कांग्रेस के जी-23 खेमे ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर से हाईकमान के खिलाफ लड़ाई का शंखनाद कर दिया है। पार्टी को बचाने का नारा देकर इस मुहिम को तेज करने के संकेत भी दे दिए।
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पार्टी सूत्रों के अनुसार जी-23 खेमा अब पूरे देश में ऐसी सभाएं व बैठकें कर वंशवाद के खिलाफ आवाज उठा पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र बहाली की मुहिम को धार देने की तैयारी में है। जी-23 खेमे ने जम्मू में सार्वजनिक शक्ति प्रदर्शन कर पार्टी आलाकमान को एक संदेश देने की कोशिश की है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद कांग्रेस का जी-23 और आक्रामक रुख अख्तियार कर सकता है। 


दरअसल राज्यसभा में कार्यकाल पूरा होने के बाद गुलाम नबी आजाद को पार्टी की ओर से दोबारा मौका न दिए जाने के फैसले ने चिंगारी को भड़काने का काम किया। जी-23 खेमें में शामिल दिग्गज नेता इसे बदले की कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि आजाद समेत कांग्रेस के 23 नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मुहिम चलाई। इसी वजह से हाईकमान और उनके करीबियों ने आजाद को दोबारा सदन में नहीं भेजा। 

इस गुट की यह भी दलील है कि राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य लोगों ने आजाद के अनुभव की खुलेआम सराहना की, पर अपनी ही पार्टी में उनकी कद्र नहीं की गई। इसे जी-23 के नेताओं को पार्टी की मुख्यधारा से किनारे करने के फैसले के रूप में देखा जा रहा है। इसी के तहत गांधी ग्लोबल फैमिली की ओर से शनिवार को जम्मू में आयोजित शांति सम्मेलन में पार्टी के दिग्गजों ने नेतृत्व को अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की। 

कांग्रेस की राह व दिशा पर संदेश देने की होगी कोशिश
जी-23 गुट से जुड़े सूत्रों ने बताया कि यह मुहिम अब रुकेगी नहीं। सभी राज्यों में जी-23 के नेताओं व उनके समर्थकों की सभाएं और बैठकें की जाएंगी। यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि कांग्रेस किस राह पर जा रही है और उसकी दिशा क्या हो गई है। कैसे कुछ लोग इसे कमजोर करने की लगातार कोशिशें कर रहे हैं। कभी केंद्र व ज्यादातर प्रदेश में सत्तारूढ़ रहने वाली कांग्रेस अब हाशिये पर आ गई है।  

तोड़ने नहीं, पार्टी से जोड़ने की कवायद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राज बब्बर ने कहा कि नई पीढ़ी को पार्टी से जोड़ने की दिशा में काम होगा। आंतरिक लोकतंत्र बहाली की मांग करने वाले नेता पार्टी को कमजोर करने की साजिश नहीं रच रहे हैं, बल्कि वह कमजोर हुई कांग्रेस के कंधों को मजबूत करना चाहते हैं। हमारी आवाज पार्टी के उज्ज्वल सियासी भविष्य के लिए है ताकि पार्टी सत्ता में वापसी कर लोगों की आवाज बन सके।

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