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Shah Visit Jammu: गृहमंत्री शाह कश्मीरियों के साथ पहली बार मनाएंगे दशहरा, नए जम्मू कश्मीर की पेश करेंगे तस्वीर

बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Tue, 04 Oct 2022 09:14 AM IST
सार

शाह अपने दौरे के दौरान एलओसी से सटे राजोरी व बारामुला में दो रैलियों को संबोधित करेंगे। राजोरी की रैली से एलओसी से सटे राजोरी व पुंछ दो जिले के लोगों को ढेर सारी उम्मीदें बंधी हुईं है खासकर पहाड़ी समुदाय को। वह अनुसूचित जनजाति के दर्जे की घोषणा के प्रति आशान्वित हैं।

जम्मू में गृहमंत्री का स्वागत करता प्रतिनिधिमंडल
जम्मू में गृहमंत्री का स्वागत करता प्रतिनिधिमंडल - फोटो : पीआरओ
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विस्तार

अनुच्छेद 370 व 35ए हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के दूसरे दौरे पर लगभग एक साल बाद पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह कश्मीरियों के साथ पहली बार दशहरा मनाएंगे। अपने दौरे के दौरान वे कई निशाने साधेंगे। इससे पहले वे 23 अक्तूबर 2021 को दो दिनी दौरे पर आए थे। नियंत्रण रेखा (एलओसी) से पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने से बाज आने का सीधा संदेश दे सकते हैं।

370 हटने के बाद की तस्वीर बताएंगे 

इसके साथ ही एलओसी से सटे इलाके में रहने वाले पहाड़ियों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर सकते हैं कि मोदी सरकार सबका साथ सबका विकास के फार्मूले पर काम करते हुए सभी वर्गों तक विकास की किरण पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। 370 हटने के बाद प्रदेश में विकास की गंगा बहने की तस्वीर पेश करने के साथ लोगों में यह विश्वास जगाने की कोशिश कर सकते हैं कि केंद्र सरकार सभी वर्गों महिला, किसान, युवा तथा अन्य सभी लोगों की हितैषी है। 

राजोरी व बारामुला में दो रैलियों को संबोधित करेंगे

शाह अपने दौरे के दौरान एलओसी से सटे राजोरी व बारामुला में दो रैलियों को संबोधित करेंगे। राजोरी की रैली से एलओसी से सटे राजोरी व पुंछ दो जिले के लोगों को ढेर सारी उम्मीदें बंधी हुईं है खासकर पहाड़ियों को। ये अनुसूचित जनजाति के दर्जे की घोषणा के प्रति आशान्वित हैं। हालांकि, दौरे के पहले दिन सोमवार को राजभवन में पहाड़ियों तथा गुज्जर बक्करवालों के प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन में शाह से मुलाकात कर अपनी मांगे रखी हैं।

  • इससे यह कयास लगाया जा रहा है कि फिलहाल पहाड़ियों को एसटी का दर्जा देने की घोषणा टल सकती है। लेकिन इसका गृह मंत्री संकेत जरूर कर सकते हैं। रैली के माध्यम से शाह 370 हटने के बाद नए जम्मू कश्मीर की तस्वीर देश के सामने रख सकते हैं। विकास से नाता जोड़ते हुए वे 370 हटने के बाद मच रहे हो हल्ला पर विपक्षियों को निशाना पर ले सकते हैं।


इतना ही नहीं एलओसी से लगभग पांच किमी की हवाई दूरी पर राजोरी बस स्टैंड के पास हो रही रैली में पाकिस्तान निशाने पर रह सकता है। वे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के लिए पड़ोसी मुल्क को आड़े हाथों लेकर लोगों में राष्ट्रवाद का जोश भरने की कोशिश कर सकते हैं।

पाकिस्तानी गोलाबारी से बचने के लिए बंकर निर्माण

पाकिस्तानी गोलाबारी से बचने के लिए बंकर निर्माण तथा एलओसी के नागरिकों के लिए आरक्षण की बात कर वे यह संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं कि मोदी सरकार को बॉर्डर पर रहने वाले लोगों की पूरी चिंता है। राजनीतिक विश्लेषक प्रो. हरि ओम का मानना है कि शाह के दौरे से पहाड़ियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा घोषित करने की ढेर सारी उम्मीदें बंधी हुई हैं। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में तैनात अस्थायी कर्मियों को भी बेहतरी की उम्मीद है। 

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कश्मीर में विपक्ष रहेगा निशाने पर, कश्मीरियों का विश्वास जीतने की कोशिश भी

शाह कश्मीर में अपनी रैली के माध्यम से विपक्ष का निशाने पर ले सकते हैं। नेकां, पीडीपी तथा अन्य दलों को 370 हटने के बाद विकास का सच दिखाकर उन्हें आईना दिखा सकते हैं। इसमें स्वतंत्रता दिवस पर घर-घर तिरंगा फहराने के साथ ही पर्यटकों की बढ़ती संख्या, रूपहले परदे की वापसी, सिनेमा हॉल खुलने, बॉलीवुड के घाटी की ओर आकर्षित होने के साथ ही शांति व्यवस्था कायम रखने का सच बता सकते हैं।

अलगाववादियों के प्रभावहीन होने का संदेश भी दे सकते हैं। आतंकी समर्थक अलगाववादियों के रिश्तेदारों को नौकरी से बर्खास्त करने का उदाहरण पेश कर यह बता सकते हैं कि आतंकवाद के पूरे पारिस्थतिकी तंत्र को नेस्तनाबूत किया जाएगा ताकि दोबारा कोई सर उठाने का साहस न कर सके।

आतंकी वारदातों में कमी, पत्थरबाजों के गायब होने तथा आतंकियों के लगातार मारे जाने का जिक्र कर यह दिखाने की कोशिश कर सकते हैं कि अब पुराने दिन लद गए। इसके साथ ही कश्मीरियों का विश्वास जीतने की भी कोशिश करेंगे। उन्हें बताएंगे कि उनकी मदद से ही घाटी में शांति कायम है। विकास कार्य तथा पर्यटन बढ़ा है। 

370 हटने के बाद शाह का दूसरा दौरा

शाह का 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का दूसरा दौरा है। इससे पहले वे 23 अक्तूबर को दो दिवसीय दौरे पर आए थे। जम्मू में 24 अक्तूबर को हुई रैली में उन्होंने कहा था कि वह दिन दूर नहीं जब पहाड़ी समुदाय का व्यक्ति भी प्रदेश का मुख्य मंत्री बन सकता है। इससे पहाड़ियों में उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिल जाएगा। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट में पहली बार अनुसूचित जनजाति को नौ सीटों का आरक्षण दिया गया है। 

जो एसटी का दर्जा देगा बुखारी उसके साथ

नेकां से नाता तोड़ने वाले पूर्व विधायक मुश्ताक बुखारी का कहना है कि शाह की राजोरी रैली में पहाड़ियों को एसटी का दर्जा दिए जाने की घोषणा की पूरी उम्मीद है। फिलहाल भाजपा में शामिल होने का इरादा नहीं है, लेकिन यदि घोषणा हुई तो वे रैली स्थल पर ही भाजपा में अपने समर्थकों के साथ शामिल होने का ऐलान कर देंगे। बुखारी इस मुद्दे पर गृह मंत्री से नई दिल्ली में भी मिल चुके हैं।  

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