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व्रत और त्योहार: जम्मू में विजयादशमी का पर्व पांच को, साख विसर्जन के साथ संपन्न होगा नवरात्र

अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 01 Oct 2022 03:54 PM IST
सार

इस बार नवरात्र 26 सितंबर से शुरू हो गए थे जो कन्या पूजन, देवी दुर्गा की साख विसर्जन के साथ संपन्न होगें। श्री दुर्गा अष्टमी का पर्व तीन अक्तूबर, श्री दुर्गा नवमी चार अक्तूबर और विजयादशमी का पर्व पांच अक्तूबर को मनाया जाएगा।

नवरात्र के मौके पर वैष्णो देवी का नजारा
नवरात्र के मौके पर वैष्णो देवी का नजारा - फोटो : संवाद
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विस्तार

व्रतों और पर्वों की तिथि को लेकर कई बार असमंजस की स्थिति बन जाती है कि व्रत किस दिन रखें। इसलिए इसकी जानकारी होना जरूरी है। इस बार आश्विन नवरात्र 26 सितंबर से शुरू है, जो कन्या पूजन, देवी दुर्गा की साख विसर्जन के साथ संपन्न होगा। श्री दुर्गा अष्टमी का पर्व तीन अक्तूबर, श्री दुर्गा नवमी चार अक्तूबर और विजयादशमी का पर्व पांच अक्तूबर को मनाया जाएगा।



कुछ भक्त अष्टमी में और कुछ नवमी के दिन साख विसर्जन एवं कन्या पूजन करते हैं। अगर किसी कारणवश भक्त अष्टमी या नवमी तिथि को साख प्रवाहित एवं कन्या पूजन नहीं कर पाये, तो चतुर्दशी तिथि को साख प्रवाहित एवं कन्या पूजन कर सकते हैं।


महंत रोहित शास्त्री के अनुसार नवरात्र के नौ दिनों में उपयोग में लाई सामग्री, कलश, परात में बोये साख, मिट्टी तथा अन्य सभी चीजों को किसी तालाब या नदी में बहा देना चाहिए। धर्म ग्रंथों के अनुसार तीन वर्ष से नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात माता का स्वरूप मानी जाती हैं।

कन्या पूजा के बिना नवरात्र का अनुष्ठान संपन्न नहीं होता। इस दिन देवी दुर्गा के भक्त कन्या पूजन भी करते हैं। मान्यता के अनुसार कुछ परिवारों में कन्या पूजन अष्टमी के दिन होता है, तो कुछ में नवमी के दिन। इन कन्याओं को मां दुर्गा के नौ रूपों के नौ स्वरूप मान कर पूजा की जाती है।

मां दुर्गा की पूजा के बाद कंजक को भोजन कराया जाता है। नौ कन्याओं के साथ ही एक लड़के को भी भोजन कराया जाता है। कन्या पूजन से पहले कन्याओं के पैर साफ  पानी से धोएं और तिलक लगाकर मौली बांधें।

कन्याओं से आशीर्वाद लेकर इन्हें भेंट स्वरूप कुछ दक्षिणा देते हैं। कन्या पूजन के बाद नवरात्र का आखिरी काम होता है व्रत खोलना। इसे नवरात्र पारण कहते हैं। 

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