ड्रोन से पहुंचेगी कोरोना वैक्सीन: जम्मू-कश्मीर में सफल ट्रायल, 18 मिनट में दवा लेकर जम्मू से मढ़ अस्पताल पहुंचा ड्रोन  

अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 27 Nov 2021 04:58 PM IST

सार

जम्मू-कश्मीर में ड्रोन से कोरोना वैक्सीन पहुंचने का ट्रायल सफल रहा। इसके बाद इसे सभी जिलों में लागू करवाने की कवायद की जा रही है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसका ट्रायल शुरू करवाया। 
 
जम्मू में कोरोना वैक्सीन ले जाने वाला ड्रोन।
जम्मू में कोरोना वैक्सीन ले जाने वाला ड्रोन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दुर्गम इलाकों में अब कोविड वैक्सीन समेत अन्य जरूरी सामान पहुंचाना बेहद आसान होगा। दवाओं समेत आपात स्थिति में जरूरी सामान पहुंचाने के लिए ड्रोन की सेवा ली जाएगी। शनिवार को सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में ड्रोन का सफल ट्रायल किया गया। इसमें आईआईआईएम से ड्रोन के माध्यम से मढ़ इलाके में स्थित अस्पताल तक दस किलो भार के बक्से में कोविड वैक्सीन पहुंचाई गई।
विज्ञापन


बेंगलुरू स्थित नेशनल एरोस्पेस लेबोरेटरी में स्वदेशी निर्मित यह ड्रोन अपने साथ बीस किलोग्राम भार उठाकर ले जा सकता है। इसका अपना वजन लगभग 55 किलोग्राम है। पहले ट्रायल में इसमें दस किलो वजन भेजा गया। इसे स्वास्थ्य क्षेत्र के अलावा बाढ़, हिमस्खलन जैसी आपदाओं में खाद्य और दवाएं भेजने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। आईआईआईएम से मढ़ अस्पताल तक के लिए ड्रोन ने हवाई मार्ग 11.5 किलोमीटर का सफर तय किया। यही नहीं ड्रोन को अस्पताल की छत पर बनाए गए गोल घेरे में सफलता पूर्वक उतारा गया।


आईआईआईएम में एलईडी स्क्रीन से इसका प्रसारण भी हुआ। ड्रोन से भेजे गए बॉक्स में कोविड वैक्सीन की 50 वायल भेजी गई थी। इसके आठ पंख होने के साथ आठ बैटरियां लगी थीं। जिसमें डाउनलोड प्रक्रिया से इसे शुरू किया गया। ड्रोन के उड़ने से पहले उसमें उपजिला अस्पताल की लोकशन डाली गई थी। यह जीपीएस आधारित ड्रोन अपने लक्ष्य पर सटीक उतरता है। जमीन से तीन किमी तक सीधा ऊपर जा सकता है, लेकिन आईआईआईएम से यह मात्र 300 मीटर की ऊंचाई पर उड़ा। इसे जमीन के बजाय जीपीएस से नियंत्रित किया जाता है। इसमें कोलिजन सेंसर लगे हैं, जिसमें मकान, हवाई जहाज आदि के सामने आने पर हादसे की आशंका कम होती है। इसे उड़ाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों से अनुमति लेनी होती है।

18 किमी दूर 18 मिनट में पहुंची वैक्सीन
आईआईआईएम से उपजिला अस्पताल की सड़क मार्ग से दूरी 18 किमी थी, लेकिन ड्रोन से हवाई मार्ग से यह साढ़े 11 किमी रह गई। सड़क मार्ग से एक घंटे के बजाय यह हवाई मार्ग से 18 मिनट में ही पहुंच गया। ड्रोन में हल्की निर्माण सामग्री लगाई गई है, ताकि यह अधिक वजन उठा सके। जीपीएस खराब होने की सूरत में भी अन्य सेंसर से यह खुद ही लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम है। इसे आसानी से फोल्ड कर गाड़ी में ले जाया जा सकता है। मेडिकल के अलावा कृषि पेस्टिसाइड में ड्रोन 100 एकड़ में एक घंटे में सप्रे कर सकता है। एक अन्य एप्लिकेशन में अरोमा मिशन के तहत भी इसकी सेवाएं ली जा सकती हैं। इंजन बंद होने की सूरत में ड्रोन ऑटोमेटिक सेंसर से इमरजेंसी लैंडिंग कर सकता है। यह प्रतिघंटा 36 किमी की रफ्तार से उड़ सकता है। भारत में तीन औद्योगिक पार्टनर मिलकर ड्रोन का निर्माण शुरू करेंगे। इसमें दो दिल्ली और एक बेंगलुरू से है। इसे रैपिड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम कहते हैं।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00