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कश्मीर: दरबार मूव पर भी हो सकता है बड़ा फैसला, 600 करोड़ का खर्च अब घटकर हो सकता है 25 करोड़

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Wed, 21 Aug 2019 09:38 PM IST
दरबार मूव
दरबार मूव - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद आने वाले 31 अक्तूबर से जम्मू-कश्मीर में केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर लागू होने वाली नई व्यवस्था में दरबार मूव की परंपरा पर भी अहम फैसला हो सकता है। हर छह महीने पर शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन राजधानियों के बीच होने वाले दरबार मूव पर 600 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। नई व्यवस्था में दरबार मूव को कुछ विभागों और विभागाध्यक्षों तक ही सीमित करने का विचार किया जा रहा है। नए फार्मूले पर अमल से खर्च भी 20 से 25 करोड़ तक ही रह जाएगा।
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दरबार मूव के साथ नागरिक सचिवालय और 38 विभागों के दस हजार से ज्यादा कर्मचारी छह-छह महीने के बाद जम्मू से श्रीनगर और श्रीनगर से जम्मू मूव होते हैं। दरबार मूव से जुड़े कर्मचारियों के अलावा साजो-सामान एक से दूसरे राजधानी शहर में पहुंचाने में 600 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यही नहीं, साल में करीब एक महीना नागरिक सचिवालय और दरबार मूव से जुड़े विभागों में आम लोगों का कामकाज भी नहीं हो पाता है।

भाजपा और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ हर छह महीने पर दरबार मूव पर होने वाले खर्च पर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि व्यवस्था में सीमित बदलाव कर हर साल 575 करोड़ रुपये बचाए जा सकते हैं। इस धन को बुुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों पर खर्च किया जा सकता है। दोनों संगठनों ने इस बारे में होमवर्क कर जानकारी केंद्र सरकार तक भी पहुंचा दी है।

सूत्रों का मुताबिक इसके बाद वर्तमान व्यवस्था में बदलाव पर चिंतन-मंथन शुरू हुआ। शुरुआती चर्चा में तय पाया गया कि नागरिक सचिवालय दोनों जगह साल भर काम कर सकता है। दरबार मूव में केवल 38 प्रशासनिक विभागों के आयुक्त/सचिव ही इधर-उधर आएं-जाएं। मुलाजिमों को इससे मुक्त रखा जाए। चर्चा के बाद अंतिम फार्मूले को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
 

1872 से चल रही हैं दरबार मूव की परंपरा 

महाराजा रणवीर सिंह के शासनकाल में 1872 से दरबार मूव शुरू हुआ था। तब आवाजाही के संसाधन और संचार के साधन सीमित थे। मौजूदा वक्त में जम्मू से श्रीनगर के बीच हवाई जहाज से 35 मिनट लगते हैं। दोनों जगह की गतिविधियों की जानकारी भी मुश्किल नहीं रह गई है।
 

'जम्मू और श्रीनगर में नागरिक सचिवालय 12 महीने खुलना चाहिए। दरबार मूव में केवल प्रशासनिक विभागों के आयुक्त/सचिव ही मूव करें।'- रवींद्र रैना, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा 

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