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तुलसी माता की भगवान विष्णु भगवान से होती रिति रिवाज से शादी

Jammu and Kashmir Bureauजम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sat, 09 Nov 2019 01:54 AM IST
माहाजन सभा मे तुलसी वीवाह
माहाजन सभा मे तुलसी वीवाह
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जम्मू। देवोत्थान एकादशी के अवसर पर शुक्रवार को शहर भर में लोगों में तुलसी विवाह का उत्साह दिखा। तुलसी की विशेष पूजा-अर्चना की गई। जहां पर तुलसी के पौधे को 12 साल हो गए थे, वहां तुलसी विवाह का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में महाजन सभा हाल में महिलाओं ने तुलसी माता का विवाह डोगरी संस्कृति के मुताबिक किया।
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शुक्रवार की शाम तीन बजे हाल में पहले तुलसी माता को तैयार किया गया। इसके बाद यज्ञ का आयोजन हुआ। इसमें सबने आहुतियां डालीं। इसके बाद हाल में शादी के गीत बताए गए। मंडप भी सजाया गया। बैंडबाजों की धुनों पर महिलाओं ने नृत्य भी किया। फिर शाम साढ़े पांच बजे विष्णु भगवान की बारात रघुनाथ मंदिर से आई। इस दौरान पूरे रीति-रिवाज से सात फेरों के बाद तुलसी माता की शादी हुई। इस मौके पर महिलाओं चमेली, कविता, कामनी, बीना, विमला आदि ने बताया कि अब अपनी बेटी तुलसी की शादी कर रहे हैं। शादी में तुलसी को सजा गया गया है। शृंगार किया गया है। बारात आने के बाद तुलसी माता को विदा कर देंगी।
इसी तरह शहर के घरों में भी तुलसी विवाह पर विशेष पूजा का आयोजन किया गया। इसमें गन्ने, आंवले और मूली की जमकर बाजारों में खरीददारी हुई। शाम के समय पूजा-अर्चना की गई और तुलसी माता की फेरियां ली गईं। जहां पर 12 साल तुलसी के पौधे को उगे हो गए हैं। उन घरों में तुलसी की शादी हुई। पूरे विधि विधान से महिलाओं ने एकत्रित होकर तुलसी माता को विदाई दी।
शादी में भाग लेने वाला जाता सीधा बैकुंठ धाम
इस दिन लोग व्रत रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो लोग तुलसी माता की शादी में भाग लेता है, उसे बैकुंठ धाम जाने का अवसर मिलता है। साथ ही मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।
क्यों मानते हैं तुलसी विवाह
शिव मंदिर न्यू प्लांट के पुजारी पुरुषोत्तम दास ने अनुसार जालंधर राक्षस भगवान शिव का भक्त था। ऐसे में वह शिव से मिलने गया। यहां पर पार्वती माता से शिव का बनाकर मिला था मगर पार्वती ने पहचान लिया था। इसके बाद विष्णु भगवान ने माया से जालंधर की पत्नी विंद्रा को मोहित किया था और राक्षस के भेष में उसे मिले थे। उसे भी सच्चाई पता चलती है और उसका पतिव्रज टूटता है। इसके बाद वह आग में कूद जाती है। विष्णु भगवान योग माया की शरण में जाते हैं। बीज के बोने के बाद तुलसी का पौधे उगा था और विष्णु भगवान से शादी हुई थी। इसके बाद इस दिन सब तुलसी का विवाह घरों में रचाते हैं।
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