सरकार के पास कामकाज को चार महीने ही बचे

Jammu Updated Wed, 07 May 2014 05:31 AM IST
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जम्मू। रियासती हुकूमत के पास अब कामकाज के लिए सिर्फ चार महीने का समय ही बचा है। तकरीबन सवा सौ दिन के भीतर बड़ी विकास परियोजनाओं, फैसलों और नेकां-कांग्रेस के घोषणापत्रों को अमलीजामा पहनाना साझा सरकार के समक्ष चुनौती है। लिहाजा मंत्रियों और विधायकों ने इस वर्ष के जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर महीनों को अपने विधानसभा क्षेत्रों में समर्पित करने की रणनीति भी बना ली है।
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वजह साफ है। यह मई महीना दरबार मूव, लोकसभा चुनाव के लिए मतदान और इसके नतीजों के बाद पैदा होने वाले सियासी हालात की भेंट चढ़ेगा। अक्तूबर - नवंबर में राज्य में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के साथ आचार संहिता लागू होना भी तय है। राज्य में पिछले लोकसभा चुनाव भी नवंबर-दिसंबर 2009 में ही हुए थे। लिहाजा जून से सितंबर महीने का समय ही सत्ता पक्ष के पास कामकाज के लिए बचा है। खास बात यह है कि इस दौरान श्रीनगर में राज्य विधानसभा का संक्षिप्त सत्र भी होगा।
साझा सरकार के मंत्री भी स्वीकार करते हैं कि रियासत में संविधान के 73वें संशोधन के मुताबिक पंचायत राज को अमलीजामा पहनाने, कटड़ा और श्रीनगर में अवैध भवनों को सील करने की कानूनी प्रक्रिया से मुक्ति दिलाने और सरकारी नौकरियों में फास्ट ट्रैक भर्ती आदि महत्वपूर्ण फैसलों पर चार महीनों के भीतर लागू करना चुनौती है। इसके अलावा सबसे बड़ी मुश्किल राज्य सरकार के समक्ष चार महीनों के भीतर नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन संबंधी लिए गए फैसले को लागू करना है। खास बात यह है कि अभी तक राज्य सरकार ने नई प्रशासनिक इकाइयों से वंचित इलाकों की शिकायतों को दूर करने के लिए समिति का गठन भी नहीं किया है। इसकी घोषणा खुद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में बजट सत्र के दौरान की थी।
इस संबंध में कानून मंत्री मीर सैफउल्लाह का कहना है कि बजट सत्र की समाप्ति के साथ ही आचार संहित लागू हो गई। इस दौरान दरबार भी मूव हो गया। लिहाजा आचार संहित हटते ही लंबित मसलों को साझा सरकार अवाम हित में प्राथमिकता के आधार पर हल करेगी।
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