केंद्र ने सुरक्षा बलों की तैनाती का खर्च मांगा

Jammu Updated Tue, 28 Jan 2014 05:48 AM IST
जम्मू। आर्थिक मोर्चे पर रियासत सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। योजना आयोग ने विशेष योजना सहायता मद के दो हजार करोड़ रुपये अब तक जारी नहीं किए हैं, नतीजतन विकास योजनाएं अधर में लटकी हैं। वित्तीय वर्ष के बचे दो महीनों में योजनाओं का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन हो गया है।
इस बीच केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती के मद में राज्य का हिस्सा मांगकर परेशानी में इजाफा कर दिया है। जम्मू-कश्मीर को अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती के खर्च का दस प्रतिशत भुगतान करना है। इस मद में 742 करोड़ बकाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पत्र लिखकर रियासत सरकार से इस राशि के भुगतान के लिए दबाव बनाया है।
विशेष राज्य के दर्जे के कारण केंद्र की योजनाओं में रियासत सरकार को 90 प्रतिशत अनुदान मिलता है और रियासत के लिए दस प्रतिशत शेयर निर्धारित है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती पर हो रहे खर्च में यही फार्मूला लागू किया है। रियासत में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और सीमा सशस्त्र बल की 50 बटालियन तैनात हैं, जबकि सेना के जवानों की संख्या लगभग साढ़े तीन लाख है। सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस और मुख्य विपक्ष पीडीपी की ओर से सेना और अर्द्धसैनिक बलों की संख्या घटाने की मांग केंद्र सरकार से की जाती रही है। सेना, सुरक्षा बल और केंद्र सरकार इसके पक्ष में नहीं है। रियासत के गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पिछले साल केंद्र सरकार से पैरा मिलिट्री फोर्सेज की तैनाती के मद में रियासत के हिस्से को माफ करने की मांग की थी। तब इस मद का बकाया लगभग 514 करोड़ रुपये था।
अब केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा फिर से राशि मांगे जाने के बाद रियासत सरकार ने केंद्र के समक्ष यह मामला उठाया है। लोकसभा चुनाव करीब है लिहाजा पैरा मिलिट्री फोर्सेज की संख्या चुनाव आयोग की अनुशंसा पर बढ़ाई भी जा सकती है। इस तरह इस मद का बकाया और बढ़ सकता है। फिलहाल रियासत सरकार केंद्र को इस मद में भुगतान करने की स्थिति में नहीं है।
नेकां दोहरा चरित्र अपना रही:भाजपा
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य और रियासत के मुख्य प्रवक्ता जितेंद्र सिंह ने कहा है कि सेना और सुरक्षा बलों की तैनाती मुद्दे पर नेशनल कांफ्रेंस दोहरा चरित्र अपनाती रही है। केंद्र ने पैरा मिलिट्री फोर्सेज की तैनाती मद में बकाया राशि के भुगतान की बार-बार मांग की है लेकिन भुगतान नहीं किया गया। नेकां एक ओर सेना और सुरक्षा बलों की वापसी की मांग करती रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र के खर्च पर इसका उपयोग करती रही है।

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