सरकार की मजबूरी बना पीपीपी मोड

Jammu Updated Mon, 20 Jan 2014 05:49 AM IST
जम्मू। चिकित्सा शिक्षा मंत्री ताज मोहिउद्दीन ने सुपर स्पेशलिटी और जीएमसी में कई संसाधनों की व्यवस्था को पीपीपी मोड (प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप) के अधीन करने की मजबूरी का ठीकरा केंद्र की नीतियों पर फोड़ा है। इसके अलावा फंड की कमी को इसका कारण बताया है। उनका कहना है कि सुपर स्पेशलिटी के निर्माण के दौरान दो एजेंसियों को ढांचे और संसाधनों के लिए फंड दिया गया लेकिन संसाधनों की उपलब्धता के लिए विभाग से राय नहीं ली गई, जिससे संसाधनों की कमी की समस्या आई है। पीपीपी मोड व्यवस्था जनता की सुविधा के लिए शुरू की जा रही है। अगर इसमें विभाग के डाक्टर विरोध करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शनिवार को सचिवालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए मंत्री ने कहा कि एक साजिश के तहत पीपीपी मोड का विरोध करवाकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। पिछले वित्त वर्ष में जीएमसी में नौ करोड़ रुपये लैप्स होने के मामले पर मंत्री ने कहा कि टेंडर और अन्य दूसरी औपचारिकताओं में देरी के कारण फंड को सिविल यूनिट में शिफ्ट करने के लिए वित्त विभाग को कहा गया था लेकिन ऐसा न होने पर फंड लैप्स हो गया। चालू वित्त वर्ष में अभी बचे हुए तीन करोड़ 12 लाख रुपये पर मंत्री ने कहा कि एमआरआई के अपग्रेडेशन पर फंड को लगाया जा रहा है।
सुपर स्पेशलिटी में अर्थिंग न होने के कारण आपरेशन थियेटर बंद हुए, जिन्हें बहाल करने के लिए नए तार डाले जा रहे हैं। सुपर स्पेशलिटी के लिए निर्माणाधीन एजेंसी सीपीब्ल्यूडी के पास अभी भी 3.50 करोड़ रुपया पड़ा है। विभाग के पास सर्जन हैं लेकिन संसाधन ही उपलब्ध नहीं हैं, जिसे चलाने के लिए पीपीपी मोड व्यवस्था करना मजबूरी है। अस्पतालों में मंत्री द्वारा अपने लिए अलग से कमरों का निर्माण करने के प्रश्न पर मंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था सिर्फ इसलिए की गई है कि वहीं पर फैकल्टी से सीधी बात करके उनके और जनता से जुड़े मसलों को हल किया जा सके। उनके अनुसार पीपीपी मोड सरकारी मानदंडों और पूरे नियमों पर ही शुरू किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पीपीपी मोड का मेडिकल टीचर एसोसिएशन के अलावा कई विपक्षी दल विरोध कर चुके हैं।

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