पीओके रिफ्यूजी आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे

Jammu Updated Mon, 25 Nov 2013 05:43 AM IST
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जम्मू। जम्मू कश्मीर पीओके रिफ्यूजी फ्रंट 1947, 1965, 1971 ने रियासती राजस्व मंत्रालय की ओर से रिफ्यूजियों की कई मांगों को अनदेखा किए जाने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाने के संकेत दिए हैं।
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फ्रंट की ओर से रविवार को 1947 में पाक सेना और कबाइली हमले का बहादुरी के साथ सामना करते हुए शहीद हुए परिवारों के सदस्यों की स्मृति में बख्शी नगर के महेशपुरा चौक में शहीदी दिवस मनाया और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधान रछपाल सिंह चिब ने इस अवसर पर कहा कि कबाइली और पाक सेना के हमले से बचने के लिए करीब 31619 परिवारों के रियासत और देश के विभिन्न राज्यों में सुरक्षित स्थानों पर शरण ली।
उन्होंने कहा कि दस हजार परिवार कैंपों में शामिल नहीं हुए। हजारों परिवारों ने आज तक पंजीकरण नहीं करवाया हुआ है और ऐसे परिवारों से सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है।
उन्होंने कहा कि रिफ्यूजियों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने रियासती सरकार को पीओके और पश्चिमी पाकिस्तान रिफ्यूजियों के वन टाइम सेटलमेंट के लिए योजना लाने को कहा। उन्होंने कहा कि रियासत के सामान्य प्रशासन विभाग ने कैबिनेट को भेजने के लिए जो सिफारिश की है, उससे पीओके रिफ्यूजी संतुष्ट नहीं है। वित्त पैकेज काफी कम दिया जा रहा है और रिफ्यूजियों ने जो नुकसान 1947, 1965 और 1971 में झेला है, उससे काफी कम है।
उन्होंने कहा कि राजस्व मंत्री ने रियासत को छोड़कर देश के अन्य राज्यों के व्यवसायिक कालेजों में रिफ्यूजियों को आरक्षण देने की सिफारिश की है, जबकि पीओेके रिफ्यूजी राज्य की नागरिकता रखते हैं और उन्हें यहां पर ही व्यवसायिक कालेजों में आरक्षण नहीं दिया जा रहा। इसके अलावा रिफ्यूजियों को संपत्ति के खिलाफ मुआवजा नहीं दिया जा रहा और इस मामले में फ्रंट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएगा।
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