यूनिवर्सिटी के बाहर विद्यार्थियों और पुलिस में धक्का-मुक्की

Jammu Updated Mon, 25 Nov 2013 05:43 AM IST
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जम्मू। शनिवार रात को जबरदस्ती उठाए जाने के बावजूद जेयू के गेट के बाहर आमरण अनशन पर बैठे चारों विद्यार्थियों (दो छात्राएं) का अनशन पांचवें दिन रविवार को भी जारी रहा। रात को अस्पताल पहुंचाए छात्रों ने ड्रिप लगवाने से इंकार कर दिया और रविवार सुबह छात्र दोबारा जेयू के गेट के बाहर पहुंच गए। जेयू के मुख्य गेट के बाहर शाम तक हंगामा होता रहा। कुलपति का पुतला जलाने की कोशिश के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने पहुंच कर छात्रों का समर्थन किया। केवल यही नहीं, समर्थन देने पहुंचे लोगों में काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।
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मूवमेंट फार जस्टिस के अधिकारियों के अनुसार अनशन पर बैठे छात्र एमएम भट्टी, कैथलीन कौर, तालिब हुसैन और मारवी सलाथिया को शुक्रवार रात बारह बजे के करीब जबरदस्ती पुलिस ने अनशन स्थल से उठा कर मेडिकल कालेज पहुंचाया। उनका टेंट भी वहां से हटा कर कब्जे में ले लिया गया लेकिन अस्पताल पहुंच कर भी छात्रों का अनशन जारी रहा। रविवार को अस्पताल गए छात्र वापस जेयू के मुख्य गेट के पास पहुंच गए। इस दौरान अन्य छात्रों के अलावा कई संगठनों के प्रतिनिधि भी छात्रों के पास पहुंच गए और बारह बजे के करीब प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारी हमारी मांगें पूरी करो, छात्र एकता जिंदाबाद, वीसी तेरे राज में अंधेर ही अंधेर है, इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। इस मौके पर जब प्रदर्शनकारी कुलपति का पुतला जलाने लगे तो पुलिस वालों ने उसे छीन लिया। इस दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का मुक्की हुई। बाद में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कुछ देर सड़क पर बैठ कर यातायात अवरुद्ध कर दिया। इस मौके पर इंटरनेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के एडवोकेट जेके काजमी, एआईएसएफ के डा. अशोक मन्हास, पूर्व एसपी सरवर चौहान, चौधरी नजाकत खटाना, शाह मोहम्मद, सीपीआई नेता जीएस चाड़क, अश्वनी प्रधान आदि ने भी प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। वक्ताओं का कहना था कि कुलपति का बर्ताव बिलकुल भी ठीक नहीं है। पूरे मुद्दे पर किसी से भी बात नहीं करना यह दर्शाता है कि जेयू प्रशासन किस प्रकार से तानाशाही कर रहा है। देर शाम को छात्र एक बार फिर अनशन स्थल पर बैठ गए थे। प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालय में गोजरी और पहाड़ी रिसर्च सेंटर के गठन, निलंबित छात्रों के निलंबन को वापस लेने और छात्रों पर लगाए गए कथित झूठे आरोपों को वापस लेने की मांग पर बुधवार से आमरण अनशन पर हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि अगर जल्द ही उनकी मांगों को नहीं माना जाता है तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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