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ध्वनिमत से विधानसभा में विनियोजन विधेयक पारित

Jammu Updated Wed, 27 Mar 2013 05:32 AM IST
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जम्मू। राज्य सरकार उधमपुर जिला मुख्यालय में देविका के उत्थान और विकास पर 7.23 करोड़ रुपये का फंड खर्च कर रही है। यह फंड पीईडी, यूईईडी, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभागों के जरिये विभिन्न योजनाओं के तहत खर्च किया जा रहा है। सरकार पहाड़ी भाषी, कोली और चौपान जाति के लोगों को जनजाति का दर्जा दिलाने के लिए प्रयत्नशील है। इस संबंध में केंद्र सरकार से कुछ मांगी गई जानकारियाें को जुटाकर जल्द भेजा जाएगा। मंगलवार को विधानसभा में एलए बिल नंबर नौ और दस (विनियोजन विधेयक) को पेश करने के बाद हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर ने यह जानकारी दी। राथर के जवाब बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक पारित करते हुए राज्य सरकार को वित्त वर्ष 2013 -14 के लिए निर्धारित फंड में से विनियोजन और भुगतान की इजाजत दे दी। विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री राथर ने पहाड़ी भाषी वर्ग को जनजाति का दर्जा देने के मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। राथर के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय के गृह सचिव से इस संबंध में 15 मई, 2012 को राज्य सरकार के नुमाइंदों की बैठक हुई थी। बैठक में तय किया गया कि पहाड़ी भाषी वर्ग को जनजाति का दर्जा देने के कारणों की व्याख्या करने के लिए रिसर्च स्कालरों की राज्य सरकार एक कमेटी गठित करेगी। बाद में इस कमेटी की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद राज्य सरकार सिफारिशों के साथ केंद्र को भेज देगी। राथर ने बताया कि इस फैसले के आधार पर कश्मीर विवि के सोशल वर्क विभाग के एचओडी डॉ. पीरजादा मोहम्मद अमीन शाह, जम्मू विवि में सोशियोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. आशीष सक्सेना, डॉ. सुरेश बाबा और डा. शाजिया मंजूर को कमेटी में शामिल किया गया है। चार महीनों के भीतर यह कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी। कोली और चौपान जातियों को एसटी वर्ग का दर्जा देने के सवाल पर राथर ने कहा कि केंद्र ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी मांगी है।
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लिहाजा सभी जिलाधीशों को इस संबंध में विस्तार से रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने की हिदायत दी गई है, ताकि केंद्र की शंकाओं को दूर किया जा सके। उधमपुर जिला मुख्यालय के मास्टर प्लान संबंधित मसले पर राथर ने स्पष्ट किया कि इसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है। अब इसे आपत्तियों और सुझावों के लिए स्थानीय पब्लिक के बीच पेश किया जाएगा। अधिसूचना के तहत मास्टर प्लान में संबंधित इलाकों को शामिल करने के बाद उधमपुर विकास प्राधिकरण का गठन होगा। अलबत्ता उधमपुर में गंर्गेग हिल्स पर्यावरण पार्क के विकास में रुकावट की वजह फंड की कमी बताई।
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