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लियाकत पर नेकां विधायकों के कार्यस्थगन से घिरी सरकार

Jammu Updated Tue, 26 Mar 2013 05:32 AM IST
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जम्मू। दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार पूर्व आतंकवादी लियाकत शाह के मामले को लेकर नेकां के विधायकों द्वारा कार्य स्थगन प्रस्ताव से रियासत सरकार घिरती नजर आई। सोमवार को इस मुद्दे पर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। पैंथर्स पार्टी के विधायकों का कहना है कि पहली बार सत्तापक्ष के विधायकों ने कार्य स्थगन प्रस्ताव लाया। इससे स्पष्ट है कि सरकार अल्पमत में आ गई है। पैंथर्स विधायकों ने सरकार से विश्वास मत के लिए प्रस्ताव पेश करने की मांग की। स्पीकर अनुदान मांग पर बहस में मामला उठाने और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा जवाब की बात कहकर सदस्यों को शांत कराया। स्पीकर ने कार्य स्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया।
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विधानसभा की बैठक शुरू होते ही नेशनल कांफ्रेंस के विधायक नासिर असलम वानी ने लियाकत का मामला उठाया। विधायक वानी नेकां के कश्मीर के प्रोविंसियल प्रेसिंडेट भी हैं। नेकां विधायक सदन की कार्यवाही रोककर लियाकत मामले पर चर्चा चाहते थे। पैंथर्स विधायकों ने विरोध करते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देंगे। स्पीकर मुबारक गुल ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है। मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की बातचीत के बाद एनआईए को इसकी जांच सौंपी गई है। पैंथर्स विधायक हर्षदेव और बलवंत सिंह मनकोटिया ने कहा कि सदन में वैसे लोगों पर चर्चा नहीं होनी चाहिए जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं। पहले अफजल पर कार्यस्थगन लाया गया और अब लियाकत के मामले में भी ऐसी ही हो रहा है।
बाद में सदन से बाहर नेकां के विधायक वानी ने कहा कि 2010 में रियासत सरकार ने नीति बनाई थी जिसके तहत वैसे लोगों की वापसी का इंतजाम किया गया था जो हथियार छोड़कर सामान्य जिन्दगी बसर करना चाहते हैं। पहले भी कई लोग पीओके से कश्मीर लौटे हैं।
ऐसे भटके युवकों की वापसी के लिए बनाई गई नीति के तहत लियाकत भी लौट रहा था। रास्ते में उसकी गिरफ्तारी हो गई। लियाकत के परिवार वालों का कहना है कि उसने जनवरी 2012 में वापसी के लिए आवेदन किया था। विधायक वानी ने कहा कि वह चाहते थे कि सदन की भावना से केंद्र सरकार को अवगत कराया जाए। कांग्रेस विधायक शरीफ नियाज ने कहा कि एनआईए इस मामले की जांच कर रही है। जांच से तथ्य सामने आ जाएंगे।
ग्रामीण विकास मंत्री अली मोहम्मद सागर ने सदन से बाहर कहा कि मुख्यमंत्री ने इस मामले पर केंद्र से बात की है। अगर लियाकत नीति के तहत वापस आ रहा था तो उसे सामान्य जिन्दगी के लिए मौका दिया जाना चाहिए। नजीर अहमद गुरेजी ने कहा कि एनआईए इस मामले की समयबद्ध सीमा में जांच करे। बंदूक छोड़कर वापस आने वाले को प्रताड़ित करने पर तय नीति को झटका लग सकता है। संसदीय और कानून मंत्री मीर सैफुल्लाह ने कहा कि इस मुद्दे पर कार्यस्थगन गलत है। लियाकत नीति के तहत आ रहा था तो उसे छोड़ दिया जाना चाहिए। पैंथर्स विधायक हर्षदेव और बलवंत सिंह मनकोटिया ने कहा कि दिल्ली और रियासत में एक ही गठबंधन की सरकार है। किसी आतंकवादी के समर्थन से सुरक्षा बलों का मनोबल गिरता है।
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