अदालती आदेश संकलित न करने पर जताई नाराजगी

Jammu Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
जम्मू। कुछ पुलिस अफसरों, राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों द्वारा भूमाफियाओं के साथ मिलकर जम्मू और सांबा क्षेत्र में सरकारी जमीन पर कब्जा किए जाने के मामले में डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताई है।
चीफ जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस हसनैन मसूदी से युक्त डिवीजन बेंच ने प्रोफेसर एसके भल्ला द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि जवाबदेह ने अदालत आदेश को संकलित न करने और 18 दिसंबर 2012 के आदेश में मांगी गई तमाम चीजों को नहीं रखा। इसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि विजिलेंस कमिश्नर द्वारा 24 अप्रैल 2006 को दी सिफारिशों को क्यों नहीं माना। बेंच के इस सवाल पर सीनियर एएजी गगन बसोत्रा ने इस मामले में कुछ समय देने की गुजारिश की। इस पर बेंच ने एक जनवरी 2013 तक का समय दिया। साथ ही निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर तमाम रिकार्ड भी पेश किए जाएं।
याचिका में कहा गया कि विजिलेंस कमिश्नर को इस संबंध में सिफारिश किए छह साल बीत चुके हैं, जिसमें स्पष्ट किया गया कि सरकारी जमीन पर कब्जा हुआ लेकिन इसके बावजूद जमीन से कब्जा छुड़वाने में कोई कार्यवाही नहीं की गई, क्योंकि कब्जाधारी एक सांसद सदस्य होने के अलावा रियासत का पूर्व स्वास्थ्य मंत्री है। इतना ही नहीं, कठुआ जिले का राजस्व विभाग इस संबंध में दबाव में है और उसने 14 मई 2012 को दर्ज आरटीआई का जवाब देते हुए इस संबंध में जानकारी होने से अनभिज्ञता जताई। साथ ही विजिलेंस की जांच रिपोर्ट की जानकारी होने से इंकार किया। उल्लेखनीय है कि सांसद चौधरी लाल सिंह और उनका परिवार गांव करांडी खुर्द में 317 कनाल जमीन पर कब्जा किए बैठा है। याचिकाकर्ता ने बेंच से आग्रह किया कि चौधरी लाल सिंह के कब्जे वाली 92 कनाल छह मरला सरकारी जमीन को वापस लिया जाए। साथ ही मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को निर्देश दिया जाए कि वह इस संबंध में एटीआर दर्ज करें। इसमें बताएं कि अप्रैल 2006 में विजिलेंस कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद जमीन वापस लेने के लिए क्या किया गया। जेएनएफ

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