‘एमआरपी का खेल’ धड़ल्ले से जारी

Jammu Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
जम्मू। अकसर ऐसा देखने को मिलता है कि बाजार में बिकने वाले कई सामानों पर दुकानदार द्वारा ही एमआरपी का टैग लगा दिया जाता है और उसी के आधार पर ग्राहक से कीमत वसूली जाती है। शहर के लोगों के अलावा पर्यटकों के साथ प्रोडक्ट के ऊपर खुद एमआरपी (मैक्सिमम रिटेल प्राइज) का टैग लगाने वालों की अब खैर नहीं। पिछले कुछ समय से शहर के कुछ दुकानदारों द्वारा ग्राहकों के साथ खेला जा रहा ‘एमआरपी का खेल’ अब नहीं चलेगा। यानी नियम और कानून के अनुसार संबंधित प्रोडक्ट पर सिर्फ उत्पादक ही एमआरपी, पैकिंग डेट, उत्पादक का पता, साइज, कंज्यूमर हेल्प लाइन नंबर और अन्य जानकारी प्रिंट करवा सकता है। इसके अलावा यदि प्रोडक्ट प्रिंटेड नियमों पर खरा नहीं उतरता है तो उत्पादक के खिलाफ ही कार्रवाई होगी। कोटा (राजस्थान) के एक पर्यटक की शिकायत पर एक दिन पहले रघुनाथ बाजार के एक व्यापारी के प्रतिष्ठान पर छापा मारने वाली लीगल मेट्रोलाजी विभाग की टीम ने मंगलवार को त्रिकुटा नगर स्थित एक मेगा डिपार्टमेंटल स्टोर पर छापा मारा और उस पर जुर्माना भी लगाया। विभागीय अफसरों का कहना है कि अकसर व्यापारी किसी उत्पाद में प्रिंट एमआरपी और संबंधित जानकारी के ऊपर गन (टैग की मशीन) से अपना टैग लगा देता है और उसी आधार पर ग्राहक से कीमत वसूलता है। यह ‘वेट एंड मेजर्स लॉ एंड रूल्स’ के खिलाफ है। किसी भी उत्पाद पर उसका उत्पादक ही एमआरपी प्रिंट कर सकता है और दुकानदार किसी भी हालत में उससे ज्यादा वसूल नहीं कर सकता। मेट्रोलाजी विभाग के डिप्टी कंट्रोलर मानते हैं कि इस तरह की शिकायतें उनके पास आती हैं और संबंधित दुकानदार के खिलाफ जांच की जाती है।
चेकिंग के दौरान पांच हजार जुर्माना
लीगल मेट्रोलाजी विभाग ने ‘एमआरपी के खेल’ पर शिकंजा कसने के क्रम में मंगलवार को त्रिकुटा नगर स्थित ईजी डे सुपर मार्केट पर 5000 जुर्माना किया। विभाग के डिप्टी कंट्रोलर के अनुसार विभाग की टीम ने ईजी डे स्टोर पर सरप्राइज चेकिंग की। जहां सेल्स मैन द्वारा 55 रुपये के उत्पाद पर 59 रुपये वसूलते पाया गया। टीम ने इस संबंध में स्टोर के मैनेजर से पूछताछ की। स्टोर मैनेजर ने गलती स्वीकार की और विभाग ने उसके खिलाफ पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया।
क्या कहते हैं लोग
लीगल मेट्रोलाजी विभाग की ओर से की गई कार्रवाई से ग्राहक तो खुश हैं, लेकिन उनका कहना है कि विभाग को वैसे दुकानदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए जो अपने उत्पादों पर न तो रेट लगाते हैं और न ही किसी प्रकार की सूची दुकान में लगाते हैं। खासकर आवश्यक खाद्य वस्तुओं के व्यापारियों को नियमों के अनुसार ऐसा करना अनिवार्य है, लेकिन कुछ दुकानदारों को छोड़ तमाम व्यापारी सिर्फ बोर्ड लगाने की औपचारिकता पूरी कर लेते हैं। उस पर कभी उत्पादों का मूल्य अंकित नहीं करते।
व्यापारियों को नियम बताए जाएं
चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रेसीडेंट वाईवी शर्मा कहते हैं कि कई बार व्यापारी घरों में सामान बनाने वाले छोटे उत्पादकों से कम मात्रा में माल खरीदता है और उस पर अपना टैग लगता है। मेट्रोलाजी विभाग जरूर उपभोक्ताओं का संरक्षक है, लेकिन उसे व्यापारियों को नियम और कानून की आवश्यक जानकारी देनी चाहिए, ताकि व्यापारी किसी प्रकार की गलती न करें। विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि वे किस उत्पाद पर रेट लिखे जा सकते हैं।


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