शोपीस बन कर रह गई टेलीमेडिसन सुविधा

Jammu Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
पुंछ/कठुआ/जम्मू। जीएमसी, जम्मू में लोगों को आधुनिक चिकित्सा देने वाली टेलीमेडिसन सुविधा शोपीस बनी हुई है। कई सालों से ठप पड़े यूनिट को दोबारा चालू करने के लिए स्पेशलिटी यूनिट का निर्माण करके यहां एडवांस सिस्टम लगाने की कवायद की गई थी। यहां एडवांस सिस्टम को स्थापित करके सकिम सोरा में इसका मुख्य सरवर लगाया गया। इस सिस्टम के साथ जिला अस्पतालों को भी जोड़ने की योजना थी। मेडिकल कालेज श्रीनगर, स्किम शेर-ए-कश्मीर और उड़ी में भी नया यूनिट स्थापित किया गया था, लेकिन दोबारा इसे शुरू करवाने के लिए किसी ने हिम्मत नहीं दिखाई। मरीजों के लिए यह सुविधा सपना ही बनी हुई है। कठुआ और पुंछ अस्पताल में भी ऐसे ही हालात हैं।
संभाग के कई जिलों में करीब नौ साल पहले टेलीमेडिसिन सुविधा शुरू की गई थी। इसमें देश के प्रसिद्ध अस्पतालों से कान्फ्रेंसिंग के जरिये गंभीर मामलों में पीड़ित मरीजों के इलाज पर चर्चा की जाती है, मगर कई जिलों में यह सुविधा शुरू में ही दम तोड़ गई। जीएमसी में यह सुविधा वर्ष 2004 से 2006 के अंत तक नियमित रूप से चलती रही। इसमें एम्स और फोर्टिस जैसे विख्यात अस्पतालों से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये कई मरीजों को फायदा दिया गया। उस समय हर सप्ताह कैंसर और आर्थो के 2-3 मरीजों की चिकित्सा पर चर्चा होती थी। इसमें दूसरे अस्पतालों तक न पहुंचने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को काफी फायदा मिला। बीस लाख रुपये के इस प्रोजेक्ट में इंजीनियर के अभाव में दिसंबर 2006 में यह सुविधा बंद हो गई।
वर्ष 2008 के शुरू में इस सुविधा को दोबारा शुरू करने की दिशा में जीएमसी में एडवांस सिस्टम को स्थापित करके सकिम सोरा में इसका मुख्य सरवर लगाया गया, लेकिन अब तक मरीजों को टेलीमेडिसन से कोई लाभ नहीं मिल पाया है। हालांकि इसमें दवाइयों से जुड़ी जानकारी लेने का प्रावधान रखा गया है। प्रोजेक्ट अंतरिक्ष के तहत केंद्र सरकार की ओर से पुंछ जिले में भी 14 दिसंबर 2003 में स्थापित की टेलीमेडिसिन सुविधा सिर्फ दिखावे के लिए रह गई। इसी साल कठुआ जिला अस्पताल में भी शुरू की गई इस सुविधा को अहमदाबाद से आए कंपनी के एक इंजीनियर ने छह महीने तक सिस्टम को चालू रखा, लेकिन उसके बाद किसी ने इसकी सुध नहीं ली। इस दौरान करीब 4-5 बार ही टेलीमेडिसन सुविधा को इस्तेमाल में लाया गया। इसमें भी किसी मरीज के केस पर चर्चा न करके यह महज वीडियो कांफ्रेंसिंग तक ही रह गई। अस्पताल के अधीक्षक डा. जेएल शर्मा का कहना है कि सिस्टम चालू तो है, लेकिन इसे आम प्रयोग में नहीं लाया जाता है।

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