पांच मिनट में गिना दिए देश के ज्वलंत मुद्दे

Jammu Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
जम्मू। विश्वविद्यालय के ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह सभागार में वीरवार को वह मुद्दे उठे, जिनसे देश आज बुरी तरह से जूझ रहा है। डिसप्ले योर टैलेंट की भाषण स्पर्द्धा के तहत विद्यार्थियों ने गुवाहाटी में होने वाली हिंसा, कोलकाता में बलात्कार, कोयला घोटाला, टू जी घोटाला, राजनीति का गिरता स्तर, राजनेताओं का आचरण, आरक्षण, मोबाइल फोन के फायदे नुकसान, सोशल मीडिया पर सरकार सेंसर आदि पर खुल कर अपने विचार रखे। प्रतियोगिता में पच्चीस के करीब प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रत्येक प्रतिभागी को तैयारी के अलावा बोलने के लिए पांच-पांच मिनट का समय दिया गया था।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को सीरियलों के आधार पर स्टेज पर बुलाया जा रहा था। प्रतिभागियों को मौके पर ही विषय दिया जा रहा था, जिनको उन्हें ड्रा आफ लाट्स ने निकालना था। प्रतिभागियों को हिंदी, अंग्रेजी या उर्दू में अपनी बात कहनी थी। रियासत में पैसे लेकर पत्थरबाजी कर रहे युवाओं के अलावा नक्सलवाद और अन्य मुद्दों को उठाया। सीरियल नंबर छब्बीस ने भारत में युवाओं की हिंसा विषय पर भाषण दिया। उसने इसके लिए बेरोजगारी और मौकों की कमी को मुख्य रूप से जिम्मेवार ठहराया। सीरियल नंबर 29 ने अपने लक्ष्य को किस प्रकार से तय किया और उसको हासिल कैसे किया जाए।
सीरियल नंबर 29 ने कामयाबी के लिए अपने लक्ष्य पर पूरी तरह से फोकस, लगातार कोशिश, किसी से जरूर से ज्यादा प्रभावित नहीं होना, स्मार्ट वर्क, किसी की नकल न करना आदि को जरूरी बताया। सीरियल नंबर तीस ने कन्या भ्रूण कन्या पर रोक और सीरियल नंबर 31 ने आरक्षण वरदान या अभिशाप पर भाषण दिया। सीरियल नंबर 31 का तर्क था कि किसी खास कारणों से शुरू की गई आरक्षण की व्यवस्था आजादी के छह दशकों के बाद कड़ी मेहनत का विकल्प नहीं बननी चाहिए।
भारत इस समय दो हिस्सों में बंटा हुआ, जिसमें एक आरक्षण के साथ है, जबकि एक बिना आरक्षण के। इसको सकारात्मक तरीके से लागू करने की जरूरत है न कि यह उन लोगों को बेतहर स्थान दिलाए, जो कड़ी मेहनत से बचना चाहते हैं। सीरियल नंबर 32 ने क्या स्कूलों में सेल फोन के इस्तेमाल पर पाबंदी होनी चाहिए, सीरियल नंबर 38 ने क्या हम इंटरनेट पर निर्भर हैं और सीरियल नंबर 39 ने क्या इंटरनेट रिश्तों को प्रभावित कर रहा है, विषयों पर विचार रखे। सीरियल नंबर 36 ने क्या जातिवाद व्यवस्था को खत्म कर देना चाहिए, विषय पर भाषण दिया।
सीरियल नंबर 24 ने मौजूदा स्थिति के लिए मानव को ही जिम्मेवार ठहराया। उनका कहना था कि हमें दूसरे पर दोष देने के स्थान पर अपने कामकाज को देखना होगा। स्पर्द्धा में प्रो. जहूर-उद-दीन, प्रो. सतनाम कौर और डा. विश्व रक्षा ने जज की भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन स्टूडेंट कल्चरल काउंसिल की संयुक्त सचिव हरमीत कौर ने जबकि कुलभूषण ठाकुर ने जज की भूमिका निभाई।

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