मामला खत्म करने के लिए मिला था 15 लाख का आफर

Jammu Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
जम्मू। भूषण लाल के पिता मदन लाल का कहना है कि गांदरबल के दो लोगों ने सेना से मुआवजा भी ले लिया है। शवों की सही पहचान होने पर मुआवजा वापस जाने के डर से ही शवों को दोबारा निकालकर डीएनए टेस्ट कराए जाने का विरोध किया जा रहा है। मदन ने बताया कि कोर्ट आफ इन्कवायरी के दौरान सेना के एक कर्नल ने ही सूचना दी थी कि दो शवों को गांदरबल में दफनाया गया है।
पुलिस ने भी कहा था कि डीएनए टेस्ट होगा। बताया गया कि अन्य दो मजदूरों के शव कुपवाड़ा के जंगलों में ही कहीं पड़े हैं। सेना ने पहले भी इस केस को वापस लेने का दबाव बनाया था। इसके लिए उन्हें 15 लाख लेकर मामला खत्म करने का आफर दिया गया था। उन्होंने आश्चर्य जताया कि अगर पथरीबल फर्जी मुठभेड़ में मारे गए पांच कश्मीरी युवकों के मामले मेें जांच तेजी से हो सकती है, तो इसकी जांच धीमी क्यों?
घरवालों को खाने के भी लाले
जम्मू। फर्जी मुठभेड़ में मारे गए चार मजदूरों के घरवालों को खाने के भी लाले पड़े हैं। रामलाल की पत्नी महेशो देवी मजदूरी कर तीन बेटियों और दो बेटों को पाल रही है। भूषण का परिवार मदनलाल की पेंशन पर निर्भर है। उसकी दो बेटियां हैं। बुजुर्ग माता-पिता को इंसाफ का इंतजार है। रामलाल की बेटियां वंदना और विक्की बड़ी हो गई हैं, सपना सरकारी स्कूल में पढ़ रही है। बेटे विक्की और दीपक भी अपने पिता के लौटने की आस लगाए बड़े हो गए। उसका एक भाई भी बड़ा हो गया है। जो क्रेशर मेें काम करता है। बड़े बच्चों पर तो पहले ही परिवार की आर्थिक तंगी के कारण बोझ पड़ गया था। बेटी भी सिलाई का काम करके घर का हाथ बंटाती है। अब तीन छोटे भाई बहनों को मिलकर सभी पढ़ा रहे हैैं। बीपीएल योजना के तहत 25 हजार रुपये मिले। जिससे घर की छत को पक्का किया गया। दो कमरे मेें पूरा परिवार रहता है और खेतीबाड़ी भी नहीं है।
भूषण की बेटियों मोंकी और वैशाली को दादा का ही सहारा है। पत्नी सुदेश कुमारी संवाददाता को देखते ही बिलख पड़ी। उसकी सूनी आंखों में इंसाफ का इंतजार है। घरवालों ने बताया कि सेना ने मामले को दबाने की हर मुमकिन कोशिश की। सेना के एक संवेदनशील अधिकारी सुमित कोहली को सारे तथ्यों की जानकारी थी, इसीलिए उसे भी रहस्यमय हालात में दम तोड़ना पड़ा। कोहली का केवल इतना कसूर था कि उसने एक गुप्त चिट्ठी लिखकर चारों मजदूरों के घरवालों को फर्जी मुठभेड़ की जानकारी दी थी।
सुमित का नाम उन्हें तब पता चला जब उसकी मौत के बाद अखबारों में फोटो छपी। क्योंकि इसी शक्ल के अधिकारी ने सेना के कार्यालय में बताया था कि उन्हें इंसाफ मिलेगा। उन्हें चिंता की कोई जरूरत नहीं है। अब तो केस की तारीख पर जाने के लिए भी खर्चा नहीं हो पाता है।
नेताओं से भी नाराजगी
जम्मू। परिजनों ने नेताओं ने भी नाराजगी जताई। उनके अनुसार गरीब परिवार होने के कारण उनकी किसी राजनीतिक दल व नेता ने भी कोई सुध नहीं ली। हर बार चुनावों में गांव में आते हैं। उनकी व्यथा सुनते हैँ और आश्वासन देकर चले जाते हैँ। रामलाल की बेटियों को तो इतना गुस्सा था कि उन्होंने पहले तो बात करने से ही मना कर दिया। गुस्से बोलते हुए कहने लगे हर बार कई लोग आते हैँ। मीडिया भी आती है। फोटो खिंचती है। बेात करती है और चली जाती है। नेता भी पहुंचते हैं। लेकिन कोई भी उनकी दशा के बारे में जानकारी नहीं लेता है। जैसे तैसे अब सभी बढ़े हो गए हैं। छोटे बच्चे थे जब उनके पिता घर से काम के लिए गए थे। अब तो उम्मीद भी टूटने लगी है। सभी को बड़ी हो गई बेटी विक्की की शादी की चिंता है कि किस तरह से शादी के लिए रुपये जोड़ेंगे। हर कोई आता है उम्मीद जताकर चला जाता है।

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