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जीएमसी में बना सबसे अधिक उम्र में डायलेसिस का रिकार्ड

Jammu Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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जम्मू। जीएमसी के इतिहास में पहली बार नेफरोलाजी यूनिट में 96 साल के एक वृद्ध को डायलेसिस पर रखा गया। मक्खन सिंह निवासी सिंबल कैंप को इलाज देने के बाद घर पर ही सीएपीडी (कांटिन्यूस एंबुलेटरी पेरिटोनियल डायलेसिस, होम डायलेसिस) दिया जा रहा है। उन्हें दिन में तीन बार इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। मक्खन महाराजा हरि सिंह की फौज में शामिल होने के अलावा भारतीय सेना में शूरवीर ले. जनरल विक्रम सिंह के भी खास रहे। डाक्टरों का दावा है कि मक्खन सिंह देश में इतनी उम्र के पहले व्यक्ति हैं, जिन्हें सीएपीडी डायलेसिस से इलाज दिया जा रहा है।
सन 1915 में गांव पिडकी, तहसील रावलाकोट, पाकिस्तान में जन्मे मक्खन सिंह बताते हैं कि वह सन 1944 में जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह की फौज में चौथी जेएंडके राइफल यूनिट में भर्ती हुए। उस समय महाराज की कुल 12 यूनिट थीं। विभाजन के दौरान कबाइलियों और पाक सेना की घेराबंदी में मक्खन सिंह सकरदू (लेह-कारगिल के बीच) किले में नौ महीने फंसे रहे। जिसके बाद मेजर गंगा सिंह ने जवानों को निकलने को कहा और 15 दिन भटकते रहे। इसमें एक बर्तन में पत्ते आदि खाकर गुजारा किया और वह बर्तन आज भी उनके पास पुरानी यादों को ताजा करता है।
तीन साल जेल से छूटने के बाद दोबारा अपनी रेजीमेंट में शामिल होकर 1964 में सेवानिवृत्ति हुए। इस दौरान सन 1954-58 तक ले. जनरल विक्रम सिंह के साथ मक्खन सिंह बाडीगार्ड के रूप में खास रहे। मक्खन सिंह को पिछले दो साल से होम डायलेसिस दिया जा रहा है। उन्हें सेना की ओर से आर्थिक मदद मिल रही है।
जीएमसी के नेफरोलाजी यूनिट के एचओडी डा. एसके बाली का दावा है कि देश में मक्खन सिंह पहले ऐसे 96 साल के व्यक्ति हैं, जिन्हें सीएपीडी से इलाज दिया जा रहा है। उनके पेट में सर्जरी करके एक पेरिटोनियल कैथर डाला गया है, जिसमें रोजाना तीन बार डायलेसिस किया जा रहा है। फल्यूड बैग से फल्यूड को भीतर डालकर पुराना बाहर निकाला जाता है। इसमें प्रति माह करीब 20000 का खर्चा आता है। उनके अनुसार मक्खन सिंह को पहली बार जीएमसी लाने पर वह काफी गंभीर थे।
लेकिन होम डायलेसिस देने के बाद उनकी हालत काफी बेहतर है। सीएपीडी चिकित्सा में उम्र दराज मरीजों में मिजोरम के बियाकवजबला (90), कर्नाटक के जायस (92), नाइजेरिया के जोशीहुगवन (92, भारत में इलाज लिया) को इलाज दिया गया है।

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