जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ रही पानी की किल्लत

Jammu and Kashmir Bureauजम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sun, 18 Oct 2020 12:03 AM IST
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उधमपुर। जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने शनिवार को लगातार 23वें दिन पीएचई स्टेशन बाड़यां में धरना देकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब सरकार की तरफ से उनकी नियुक्ति पर ही सवाल खड़े किए जा रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की इस बयानबाजी की जितनी निंदा की जाए कम है। वहीं हड़ताल के कारण लोगों की परेशानी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
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सुबह दस से शाम चार बजे तक अस्थायी कर्मचारियों ने जलशक्ति विभाग के कार्यालय के बाहर धरना देकर नारेबाजी की। इस दौरान सरकार की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा। प्रदर्शन के दौरान जगदीश कुमार, संजय कुमार व अन्य कर्मचारियों ने बताया कि सरकार की तरफ से बयानबाजी कर कहा जा रहा है कि अस्थायी कर्मचारियों को नियम अनुसार नियुक्त नहीं की गई है। इसलिए इनकी मांगों को पूरा करना संभव नहीं है। करीब 20 वर्ष से सरकार व जलशक्ति विभाग के अधिकारी उनसे काम करवा रहे हैं। तब उनको नियम क्यों नहीं याद आए। अब जब अस्थायी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं, तो सरकार को नियम याद आने लगे हैं। सरकार की कार्यप्रणाली की जितनी निंदा की जाए कम है। जब तक उनका वेतन जारी करने के साथ नियमितीकरण को लेकर सरकार कोई निर्णय नहीं लेती है, तब तक इसी तरह से हड़ताल व प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं, हड़ताल के कारण जल संकट गहरा गया है और लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। पंचैरी, चिनैनी, मजालता, रामनगर में सबसे ज्यादा पानी की आपूर्ति प्रभावित है और लोग काफी परेशान हैं।
प्रमुख सचिव के बयान पर भड़के लोक निर्माण विभाग के अस्थायी कर्मचारी
उधमपुर। नियमितीकरण की मांग को लेकर काम छोड़ हड़ताल पर डटे लोक निर्माण विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने शनिवार को लगातार 13वें दिन भी अपनी हड़ताल को जारी रखा। सुबह से ही काफी संख्या में अस्थायी कर्मचारी विभाग कार्यालय परिसर में एकत्रित हुए तथा अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से मांग की कि उनकी मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
कर्मचारियों ने कहा कि बीते दिन पूर्व प्रमुख सचिव ने एक ब्यान में कहा था कि कर्मचारी विभाग में बैकडोर से दाखिल हुए हैं और इनका कोई हक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई हक नहीं बनता है, तो फिर बीते दिनों पूर्व हाई पावर कमेटी द्वारा कुछ अस्थायी कर्मचारियों को कैसे स्थायी किया गया है। इसके अलावा अगर मुख्य सचिव को लगता है कि यह लोग बिना किसी मंजूरी व साक्षात्कार के लगे हैं, तो इन्हें पहले ही निकाल देना चाहिए था। आज जब इन कर्मचारियों ने विभिन्न विभागों में कई वर्षों का कार्यकाल पूरा किया है। अब सरकार की ओर से उन पर बैक डोर से दाखिल होने का आरोप लगाया जा रहा है। इसे किसी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आने वाले दिनों में सरकार की ओर से उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो वह सड़कों पर उतर कर उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो जाऐंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
मांगें पूरी न होने पर सड़कों पर उतरेंगे चिनैनी के अस्थायी कर्मी
चिनैनी। मांगों के समर्थन में पिछले 23 दिन से काम छोड़ हड़ताल पर बैठे अस्थायी कर्मियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों को हल न किया गया, तो सोमवार से वह सड़कों पर उतर कर उग्र प्रदर्शन करेंगे, इस दौरान किसी भी प्रकार के नुकसान की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। शनिवार को भी जल शक्ति विभाग के कार्यालय के बाहर अस्थायी कर्मियों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया और कहा कि पिछले 23 दिन से उनकी काम छोड़ हड़ताल जारी है, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। मांगों को लगातार प्रमुखता से उठाया जा रहा है, जबकि त्यौहार का सीजन भी शुरू हो गया है। ऐसे में त्यौहार कैसे मनाएंगे उसको लेकर भी सरकार चिंतित नहीं दिख रही है। अस्थायी कर्मियों ने कहा कि उनकी मांगे पूरी न हुईं तो सोमवार से वह सड़कों पर उतर कर उग्र प्रदर्शन करेंगे। संवाद
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