ताकि जिंदा रहे रियासत चिनैनी का नाम

Udhampur Updated Mon, 20 Jan 2014 05:49 AM IST
चिनैनी। भले ही चिनैनी अब रियासत नहीं है, लेकिन अभी भी यहां कुछ ऐसी चीजें मौजूद हैं जो चिनैनी के स्वर्णिम इतिहास को याद दिलाती है। एक जमाने में चिनैनी रियासत हुआ करती थी। कई सरकारी साजो-सामान उसका गवाह है। चिनैनी के राजा के समय की बेल्ट देखकर आज हर कोई अचंभित हो जाता है। उस पर बाकायदा रियासत चिनैनी अंकित है। करीब डेढ़ सौ साल पुरानी इस बेल्ट का इस्तेमाल आज भी कुद मंडलोत का चौकीदार काकूराम करता है।
काकूराम की बेल्ट आज की नई पीढ़ी को भौचक करता है। चौकीदार काकू राम ने बताया कि उनके दादा जी चिनैनी के राजा के समय में चौकीदारी करते थे। उन्होंने करीब 70 साल तक चौकीदारी की है। उस समय उन्हें यह बेल्ट मिली थी, जिस पर चौकीदार देहात (गांव) रियासत चिनैनी लिखा हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि दादा के बाद उनके पिता मसा राम 1962 में चौकीदारी करने लगे। उन्होंने रियासत चिनैनी का नाम जिंदा रखने के लिए उसी बेल्ट का इस्तेमाल करते रहे। और अब वह खुद भी उसी बेल्ट का इस्तेमाल करता है। उन्होंने कहा कि पिता जी के साथ-साथ वह भी पिछले बीस साल से चौकीदारी कर रहा है। इस बेल्ट के इस्तेमाल का मकसद यही है कि आज की नई पीढ़ी को पता चले चिनैनी कभी रियासत थी और इसका इतिहास गौरवशाली था। उन्होंने अफसोस जताया कि आज के युवा को अपनी धरती का इतिहास पता नहीं है। बता दें कि रियासत चिनैनी 1947 से पहले होती थी। उस समय साजो सामान पर रियासत चिनैनी लिखा जाता था।

दुखद है रियासत से तहसील तक का सफर
चिनैनी के मामले में कह सकते हैं कि स्वर्णिम अतीत का वर्तमान स्याह है। किसी जमाने में मुकम्मल रियासत का दर्जा था, लेकिन आज चिनैनी सरकारी उपेक्षा का शिकार है। देश की आजादी के बाद चिनैनी को नियाबत बना दिया गया। मगर इस पूर्ववर्ती रियासत में बुनियादी सुविधाओं की लगातार कमी चल रही है। शिक्षा की नजीर लें तो चिनैनी में आईटीआई, डिग्री कालेज, पालीटेक्निक कॉलेज और गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान नहीं मिल पाए हैं। दुखद पहलु यह है कि 19वीं सदी से पहले तक जिला स्तर के तमाम दफ्तर चिनैनी में ही हुआ करते थे। उन दिनों चिनैनी के राजा को जिला सेशन जज के अधिकार प्राप्त थे। जबकि सरकारी साजो सामान पर भी चिनैनी रियासत की मुहर होती थी। 1947 में चिनैनी को नियाबत बना दिया गया। 33 वर्ष बाद 1980 में इसे तहसील का दर्जा मिला। इस उपेक्षा को दूर करने में कोई भी जनप्रतिनिधि यहां के लोगों की उम्मीद पर खरा नहीं उतर सका। इस कारण चिनैनी में आज मूलभूत सुविधाओं की भी कमी महसूस हो रही है।

स्टाम्प पेपर पर भी होती थी जागीर चिनैनी की मुहर
चिनैनी में स्टाम पेपर पर भी जागीर चिनैनी की मुहर होती थी। बताया जाता है कि चिनैनी के राजा सरकारी काम के लिए इसका इस्तेमाल करते थे। यह स्टाम पेपर जगह की खरीददारी और किसी भी प्रकार की संपदा खरीदने के काम आता था। उस समय यह पेपर चिनैनी की अपनी जागीर थी, जो इस बात का सबूत है कि चिनैनी एक रियासत थी।

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