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अस्तित्व खोती जा रही हैं शहर की प्राचीन बावलियां

Udhampur Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
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उधमपुर। देविका नगरी को कभी बावलियों का शहर कहा जाता था। शहर और इसके साथ लगते इलाकों में किसी समय सौ से अधिक बावलियां हुआ करती थीं, लोग जैसे-जैसे आधुनिक युग में कदम रखते गए बावलियां उपेक्षित होती गईं। जिसके चलते यहां की बावलियों का अस्तित्व संकट में घिरता गया। वर्तमान समय में ज्यादातर बावलियां अतीत की गर्त में समा कर इतिहास बन गई हैं और जो बची हैं वह आज भी शहर और इसके साथ लगते इलाकों की आबादी की जरूरतों के साथ-साथ प्यास बुझा रही हैं।
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कई इलाकों में तो हजारों लोग आज भी इन पर ही निर्भर हैं। राजा, महाराजाओं के समय में बावलियां ही पीने के पानी का मुुख्य साधन हुआ करती थीं। जैसे-जैसे लोगों ने आधुनिकता के दौर में कदम रखा राजाओं की जगह लोगों द्वारा चुनी गई सरकार ने ले ली। सरकार ने पीने और अन्य उपयोग के लिए पानी की सुविधा के लिए पीएचई विभाग स्थापित कर दिया। पीएचई विभाग ने नदियों और नालों से पानी लिफ्ट और फिल्टर करके लोगों के घरों में पहुंचाना शुरू कर दिया। जब लोगों को घर बैठे पानी मिलने लगा तो उन्होंने बावलियों पर जाना छोड़ दिया और फिर रख रखाव के अभाव में बावलियां अपना अस्तित्व खोने लगी। वर्तमान समय में आधी से ज्यादा बावलियां अस्तित्व खोकर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों के साथ ही शहर और साथ लगते इलाकों के कई हिस्सों में आज तक पीएचई विभाग समुचित पेयजल की व्यवस्था नहीं कर पाया है।
प्राचीन बावलियां ः गंगेड़ा में राजे दी बां, देविका में रानी बावली, बाड़या में बड़ी बां, बाड़या में निक्की बां, बाड़या में तनु दी बां, बिल्लन बावली, मंगू दी बां, देविका में चार बावलियां, रतैड़ी बावली, गंगेड़ा स्थित रानी बावली, फंगैल दी बां, डुग्गे वाली बां, अंबे हार दी बां, माई दी बां, साकन बावली, मियां बाग में पांच बावलियां, नडुए दी बां, परोचे दी बां।
पानी की समस्या गंभीर
वर्तमान समय में शहर की एक लाख से ज्यादा आबादी को हर दिन 54 लाख गैलन पानी की जरूरत है, लेकिन पीएचई विभाग अभी तक शहरवासियों को दो फिल्ट्रेशन प्लांट से केवल 38 लाख गैलन ही दे पा रहा है। हर रोज शहरवासियों को पीएचई विभाग की तरफ से 16 लाख गैलन पानी कम मिल रहा है जिसके कारण शहर के विभिन्न हिस्सों में हर रोज पानी की किल्लत की समस्या गंभीर है।
जरूरतों को पूरा कर रही बावलियां
शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल देविका के तट पर करीब सात बावलियां मौजूद हैं, जो कि लोगों की जरूरत को पूरा कर रही हैं। रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित साकनी बावली चैरी स्याल के लोगों के लिए पानी का मुख्य साधन हैं, जहां सुबह से लेकर शाम तक सैकड़ों लोग पानी भरते हैं। बिल्लन बावली सियाल सल्लन और आसपास के इलाकों के पानी की जरूरत हो पूरा कर रही है। इसी तरह रतैड़ी बावली, दंदियाल की बावलियां, लड्डन बावली, मोआड़ा मोड़ की बावली, दलाह की बावली और अन्य कई बावलियां शहरवासियों की बड़ी जरूरत बनी हुई हैं।

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