जिले के कई सरकारी स्कूलों के शिक्षक कर रहे ‘बाबूगिरी’

Udhampur Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
उधमपुर। इसे राज्य सरकार की कमजाेरी कहें या फिर लापरवाही कि विभाग में क्लर्कों की कमी का खामियाजा जिले के सरकारी स्कूलों के शिक्षक मजबूरन ‘बाबू’ बनकर भुगत रहे हैं। विभाग में हेड, सीनियर व जूनियर असिस्टेंट के कई पद वर्षों से खाली पड़े हैं। जिससे शिक्षकों के साथ कार्यरत क्लर्कों पर काम का दुगना बोझ पड़ रहा है और स्‍कूल के छात्रों का समय भी बर्बाद हो रहा है। इसके अलावा शिक्षकों के बाबू बनने से विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। अन्य सरकारी विभागों की तरह शिक्षा विभाग में भी क्लर्क का पद बहुत अहमियत रखता है। शिक्षक, प्रिंसिपल, हेडमास्टर का वेतन बनाना हो या अन्य दफ्तरी कार्य इसे क्लर्क ही पूरा करता है। कहीं थोड़ी सी भी चूक हो जाए तो शिक्षकों और बड़े अधिकारी का भी वेतन रुकने के साथ अन्य कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है, लेकिन शिक्षा विभाग में क्लर्कों की भारी कमी है। शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला में हेड असिस्टेंट के 11 पद मंजूर हैं, जबकि विभाग के पास केवल चार ही हेड असिस्टेंट हैं, सात हेड असिस्टेंट के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। इसी तरह जूनियर असिस्टेंट के 120 पद हैं। जिसमें से विभाग के पास 90 पद ही भरे हुए हैं, जबकि 30 पद पूरी तरह से खाली पड़े हैं।

छात्र करते हैं इंतजार
जिले में कुल 29 हायर सेकेंडरी स्कूल और 73 हाई स्कूल हैं। हायर सेकेंडरी स्कूल में एक सीनियर असिस्टेंट और एक जूनियर असिस्टेंट की जरूरत होती है। 29 में से 11 हायर सेकेंडरी स्कूलों में सीनियर असिस्टेंट के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। इसी तरह छह हाई स्कूलों में जूनियर असिस्टेंट के पद खाली पड़े हैं। जिसके कारण मजबूरी में स्कूल के शिक्षकों को क्लेरिकल कार्य सौंपा गया है। शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाने के बजाए बाबू बनकर कभी राजस्व विभाग के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं तो कभी अन्य क्लेरिकल कार्य में उलझे रहते हैं।

एसओ को मंजूरी नहीं
स्कूलों के अतिरिक्त जिला में 11 शिक्षा जोन के कार्यालय हैं। तो एक सीईओ और डिप्टी सीईओ का कार्यालय भी है। प्रत्येक शिक्षा जोन के कार्यालय में एक एसओ, दो हेड असिस्टेंट, चार सीनियर असिस्टेंट और चार जूनियर असिस्टेंट की जरूरत होती है। 11 जोन में आज तक एसओ के पद को मंजूरी नहीं मिली है। जबकि, सात जोन के प्रत्येक कार्यालय में एक हेड असिस्टेंट, दो सीनियर असिस्टेंट और दो जूनियर असिस्टेंट ही कार्य कर रहे हैं। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि जोन ब्बे, जिब, कुलवंता और टिकरी में एक भी क्लेरिकल स्टाफ के पद को मंजूरी नहीं मिली है।

आदेश मान रहे हैं
इस बारे में स्कूलों और जेडईओ कार्यालय में क्लर्कों का कार्य कर रहे शिक्षकों का कहना है कि उनके लिए तो अधिकारी का हुक्म की पालना करना ही सरकारी नौकरी है। वह भी चाहते हैं कि कक्षा में पहुंचकर विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करें, लेकिन सरकारी हुक्म के चलते मजबूरी में स्कूल और जेडईओ कार्यालय में बाबू बनकर काम करना पड़ रहा है। क्लर्कों का कहना था कि जिले में हर वर्ष स्कूलों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि स्कूलों में, जेडईओ और सीईओ के कार्यालय में तैनात क्लर्कों पर दोगुना बोझ पड़ा हुआ है।

क्या कहते हैं अधिकारी
शिक्षा विभाग के इंचार्ज सीईओ वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि सरकार की तरफ से क्लर्कों की प्रमोशन और नए क्लर्कों की नियुक्ति के लिए प्रयास चल रहे हैं। शिक्षा विभाग के लिए शिक्षकों से क्लर्क का काम करवाना मजबूरी हैं। जैसे ही सरकार की तरफ से नए क्लर्कों की नियुक्ति कर दी जाएगी काफी हद तक समस्या का समाधान निकल जाएगा।

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