गांवों के स्वास्थ्य केंद्र खस्ताहाल में, मरीजों का इलाज कैसे

Udhampur Updated Thu, 02 Aug 2012 12:00 PM IST
उधमपुर। जिले में लाखों लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाले स्वास्थ्य विभाग की ज्यादातर इमारतें बीमार पड़ी हैं क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के आधे से भी ज्यादा सब सेंटर, एलोपैथिक डिस्पेंसरी किराए की इमारतों में चल रही हैं। जबकि 21 में से पांच पीएचसी किराए की इमारत में चल रहे हैं। कुछ पीएचसी, सब सेंटर और एलोपैथिक डिस्पेंसरी तो कच्ची इमारतों में चल रहे हैं, जहां मरीजों के साथ डाक्टर और कर्मचारी भी परेशान हैं। सीएमओ का कहना है कि इमारतों का निर्माण कार्य का अंतिम चरण में है। जिसके बाद लोगों को ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जिला उधमपुर में एक जिला अस्पताल, दो उपजिला अस्पताल, 21 पीएचसी, 14 एलोपैथिक डिस्पेंसरी, 17 मेडिकल एड सेंटर और 97 सब सेंटर में ही रोज 65-70 हजार के करीब लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। जहां लोगों को दवाएं और डाक्टरों की सुविधाएं तो मिल जाती हैं, लेकिन किराए और कच्चे मकानों में चल रहे स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों को इलाज करवाने के लिए काफी परेशानियों से जूझना पड़ता है। जो सब सेंटर, डिस्पेंसरी और पीएचसी किराए के कच्चे मकानों में चल रहे हैं वहां लाखों रुपये का कीमती सामान खराब हो रहा है। बारिश के दौरान कच्चे मकान की छत टपकने लगती है और जिससे अंदर रखे सामान और दवाओं को नुकसान पहुंचता है।
किराए की इमारत में सामान रखने और मरीज की जांच के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण डाक्टर और फार्मासिस्ट को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बताया कि कच्चे मकान में कई बार सांप-बिच्छू निकल आते हैं। जिससे उनकी परेशानी दोगुनी हो जाती है और फिर लोगों को स्वास्थ्य देने का काम काफी प्रभावित होता है। इस समस्या के बारे में कई बार स्वास्थ्य अधिकारियों को बता चुके हैं जहां से जल्द समस्या को हल करने का आश्वासन मिलता है।
सुविधाएं राम भरोसे
जिला उधमपुर में 21 प्राइमरी हेल्थ सेंटर में से पांच किराए की इमारत में चल रहे हैं। इसी तरह 14 एलोपैथिक डिस्पेंसरी से 11, 97 सब सेंटर में से 62 और 17 मेडिकल एड सेंटर में से 16 खस्ताहाल किराए की इमारत में चल रहे हैं। आंकड़ों से अंदाजा लग जाता है कि किस प्रकार परेशानियों का सामना करते हुए स्वास्थ्य कर्मी स्वास्थ सुविधाएं दे रहे हैं और किन हालात में गांववासियों को सुविधाएं मिल रही हैं।
हालत बदतर हुई
20 हजार से 30 हजार की आबादी वाले ग्रामीण इलाकों में प्राइमरी हेल्थ सेंटर खोलने का सरकारी प्रावधान है। इस पीएचसी पर हजारों की आबादी एक डाक्टर, कुछ फार्मासिस्ट पर इलाज के लिए निर्भर होती है। जिला में पीएचसी घाड़िया, पीएचसी जोफर, पीएचसी लांदर, पीएचसी गढ़ी और पीएचसी थियाल किराए की इमारतों चल रही हैं।
पांचों पीएचसी के कच्ची इमारत में चलने के कारण गांववासी परेशानियों का सामना कर रहे हैं और इनके अंदर रखा लाखों का सामान खराब हो रहा है।
अधिकारी ने कहा
सीएमओ डा. अनिल आमला ने बताया कि डिस्पेंसरियों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि इनका कार्य 2008-09 में शुरू हुआ था और इसे 2011 में पूरा करना था, लेकिन पीडब्ल्यूडी द्वारा इनका निर्माण कार्य समय पूरा नहीं किया जा सका। जिस कारण गांववासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इनका काम पूरा होने के बाद ही दूसरी इमारतों का कार्य पूरा होगा। उन्होंने बताया कि इमारतों के निर्माण कार्य के लिए विभाग के पास फंड की कोई कमी नहीं है।



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