अनपढ़ निरक्षरता को दिखाएंगे अंगूठा

Udhampur Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
उधमपुर। शिक्षा के क्षेत्र में विकास के बड़े-बडे़ दावे करने के बावजूद आज भी दूर दराज ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को शिक्षा मिलना तो दूर उन्हें आज तक किसी अक्षर का भी ज्ञान नहीं है। जिसके कारण आए दिन उन्हें किसी न किसी के शोषण का शिकार होना पड़ता है, लेकिन अब उनको शिक्षा के लिए किसी का मोहताज नहीं होना पड़ेगा, क्योंकि केंद्र सरकार की साक्षर भारत मिशन योजना जल्द जिले में शुरू होने जा रही है। जिसमें 15 से 50 वर्ष के तक गांववासियों को शिक्षा का बुनियादी ज्ञान देकर साक्षर बनाया जाएगा।
जब कोई गांववासी कहीं दिहाड़ी पर काम कर रहा है तो गणित के अक्षरों का ज्ञान नहीं होने के कारण ठेकेदार द्वारा ठगी का शिकार हो जाता है। इसके अलावा कहीं सफर करते समय रेलवे स्टेशन पर रेल या फिर बस अड्डे पर बस के आने-जाने के समय या नंबर की जानकारी के लिए बार-बार दूसरों को पूछना पड़ता है। अक्षरों का ज्ञान नहीं होने के कारण कई बार ये लोग चतुर और जालसाज की फांस में आ जाते हैं। इसी को देखते हुए गांववासियों को साक्षर बनाने के लिए ही केंद्र सरकार ने साक्षर भारत मिशन योजना को तैयार किया है।
204 पंचायतों में खुलेंगे केंद्र
इस योजना के तहत जिला के 204 पंचायतों में पंचायत लोक शिक्षा केंद्र खोले जाएंगे। इन केंद्रों में 15 वर्ष से लेकर 50 वर्ष तक के गांववासी को शिक्षा का बुनियादी ज्ञान दिया जाएगा। इसके अलावा सात ब्लाक लोक शिक्षा केंद्र और एक जिला लोक शिक्षा केंद्र भी खोले जाएंगे। गांववासियों को इन केंद्रों में हिसाब-किताब करना सिखाया जाएगा। जिससे कहीं अगर वह दिहाड़ी लगाकर काम करता है तो वह अपनी मेहनत का पूरा हिसाब रख सके। साथ ही सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी हासिल करके उनका पूरा लाभ हासिल कर सके। इसके अलावा जहां कहीं वह अंगूठा लगाता है वहां हस्ताक्षर कर साक्षर होने का प्रमाण दे सके।
पंचायत घरों का होगा इस्तेमाल
योजना के आरंभ में गांववासियों को पढ़ाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत बनाई गई स्कूल की इमारतों में केंद्र चलाएं जाएंगे। जिनमें विद्यार्थियों की छुट्टी होने के बाद गांववासियों को शिक्षा दी जाएगी। जिन दूर दराज ग्रामीण इलाकों में सेंटर तक वाहनों के पहुंचने के लिए सड़क की सुविधा नहीं होगी, उनके लिए आवासीय सेंटर खोले जाएंगे। इसके अलावा पंचायत घरों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
सेवानिवृत्त शिक्षक देंगे योगदान
योजना के तहत गांववासियों को साक्षर बनाने के लिए पंचायतों के सेवानिवृत्त शिक्षकों और अन्य किसी सरकारी विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी की मदद ली जाएगी। जिस गांव में कोई शिक्षक या फिर अधिकारी नहीं होगा तो वहां किसी पढ़े-लिखे युवा को वालंटियर के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए इन शिक्षकों को डाइट की तरफ से विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सेंटर में गांववासियों को उम्र के हिसाब से शिक्षा दी जाएगी। शिक्षा चार चरण में दी जाएगी। इस शिक्ष्‍ाा को पाने के बाद जहां गांव की साक्षरता दर बढ़ेगी वहीं लोगों में शिक्ष्‍ाा के प्रति रुझान भी बढ़ेगा। अगर केंद्र सरकार की योजना सफल हो जाती है तो निश्चित रूप से गांव की दशा बदलेगी।
डाइट के प्रिंसिपल परमजीत सिंह ने बताया कि योजना को जल्द से जल्द अमल में लाने के लिए लगातार प्रयास चल रहे हैं। डीसी के दिशा-निर्देश में योजना की प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर सरकार के पास भेज दी गई है। जैसे ही सरकार की तरफ से हरी झंडी मिलेगी इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।

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