अब रिसुग लगाएगा आबादी पर रोक

Udhampur Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
उधमपुर। चिकित्सा के क्षेत्र में रोज कोई न कोई नए शोध हो रहे हैं। इसी क्रम में एक ऐसी अनुसंधान की कड़ी एक अनुकूल परिणाम लेकर सामने आई है जो रिवर्सेबल इनहैबिटेशन आफ स्पर्म अंडर गाइडेंस (रिसुग) इंजेक्शन के रूप में जानी जाती है। जिसके जरिए परिवार को नियोजित करने तथा जनसंख्या विस्फोट से समाज में रहने वाले लोग बच सकेंगे। इस इंजेक्शन प्रक्रिया से न कोई दर्द और न ही कोई आपरेशन का भय है जबकि भारत में ही इजाद किया गया रिसुग इंजेक्शन से नसबंदी से डरनेवाले लोग अब टेंशन मुक्त होकर इस पद्धति को अपनाने लगे हैं। उधमपुर जिला अस्पताल में इस प्रोजेक्ट के तहत हो रहे शोध के दौरान अब तक यहां के 48 पुरुषों ने इस पद्धति का लाभ उठाया है।
जिला अस्पताल में वर्ष 2007 नवंबर माह में रिसुग प्रोजेक्ट प्रयोग के तौर पर आरंभ किया गया था। जिसके अंतर्गत अब तक 48 पुरुषों द्वारा इस इंजेक्शन का लाभ उठाया गया है। गौरतलब है कि इस इंजेक्शन का इजाद भारतीय वैज्ञानिक चिकित्सक डा. एसके गुहा ने की है जो इस समय आईआईटी नई दिल्ली में प्रोफेसर हैं। वहीं,जम्मू कश्मीर रियासत के उधमपुर जिला अस्पताल में ही रिसुग इंजेक्शन पर शोध कार्य जारी है, जिसके चेयरमैन जिला मेडिकल सुपरिंटेंडेंट हैं। वहीं, इस इंजेक्शन पर शोध गुवाहाटी, पटना, एम्स नई दिल्ली, खड़गपुर, जयपुर और लुधियाना में स्थित अस्पतालों में जारी है।
रिसुग इंजेक्शन की प्रक्रिया और लाभ
इंजेक्शन लेनेवाले पुरुषों को रुपये भी प्रोत्साहन स्वरूप प्राप्त होते हैं। इंजेक्शन लेने के बाद पत्नी को भी अस्पताल में आकर चेकअप कराना पड़ता है और उसे तीन सौ रुपये नकद दिये जाते हैं। दो साल तक समय-समय पर पुरुषों को परीक्षणों से गुजरना होता है तथा जब-जब परीक्षण के लिए वे आएंगे उन्हें तीन सौ रुपये मिलेंगे। छह माह बाद उसकी पत्नी का भी परीक्षण किया जाता है और उसे भी तीन सौ रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। प्रक्रिया इंजेक्शन लेने की तिथि से दो साल तक समय-समय पर चलता रहता है।
रिसुग इंजेक्शन को लेकर प्रोजेक्ट इंचार्ज डा. केसी शर्मा ने बताया कि यह इंजेक्शन रिवर्सेबल है। पुरुष को यह इंजेक्शन दिया जाता है जिसका असर दस साल तक रहता है। यदि वह चाहे तो अपनी पहली स्थिति में आए तो उसे दोबारा एक इंजेक्शन लेना पड़ता है जिससे उसकी स्थित पहले जैसी हो जाएगी।
डा. चंद्रप्रकाश ने बताया कि भारत सरकार की ओर से इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के तहत यह रिसुग इंजेक्शन पर आधारित प्रोजेक्ट का चयन किया गया है। आगे दो साल तक चलता रहेगा। इस प्रक्रिया के पूर्ण होने पर चिकित्सा जगत को एक बड़ी उपलब्धि हासिल होगी। वहीं, अब तक 48 लोगों में से शहरी और ग्रामीण लोगों के अतिरिक्त सैन्य जवान भी हैं जिन्हें इसका लाभ मिला है।

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