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जिले में किसानों के खेतों में बंदरों का आतंक

Udhampur Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
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उधमपुर। जिला उधमपुर के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में हजारों किसान बंदरों के आतंक से त्रस्त हैं। बंदरों ने 2011-12 में किसानों के खेतों में आतंक मचाकर 877.67 लाख रुपये का नुकसान किया है। नुकसान का आंकड़ा देखने के बाद कृषि विभाग ने समस्या को गंभीरता से लेकर किसानों को हल्दी, अदरक, भिंडी की खेती करने के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया है। क्योंकि बंदर इनका सेवन नहीं करते और किसान इनकी खेती करके कम समय में अच्छा खासा लाभ हासिल कर सकते हैं।
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जिले के ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर लोग कृषि पर निर्भर हैं। मौसम के मेहरबान होने पर फसल अच्छी होगी तो किसान चैन की नींद सोते हैं। अगर फसल अच्छी नहीं होगी तो उनकी नींद उड़ जाती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से किसानों की नींद मौसम के बजाए बंदरों ने उड़ा रखी है। करीब दस वर्ष पहले ग्रामीण इलाकों में बंदरों ने दस्तक दी थी।
शुरूआत में बंदर मामूली रूप से फसल को नुकसान पहुंचाते थे, लेकिन जैसे-जैसे इनकी संख्या बढ़ती गई वैसे-वैसे नुकसान भी बढ़ता गया। वर्तमान में जिले ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में बंदर मौजूद हैं। जो कि हर वर्ष किसानों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिब, चढ़ेई, मुत्तल और अन्य कई ग्रामीण इलाकों में तो हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कुछ किसानों ने खेती करना ही छोड़ दिया है।

2145 हेक्टेयर की फसल बर्बाद
वर्तमान समय में जिला उधमपुर के 11 कृषि जोन में 100 से ज्यादा गांव बंदरों के आतंक की चपेट में हैं। 2011-12 में कृषि विभाग ने सर्वे करके आंकड़े एकत्र किए तो परिणाम जो सामने आया उससे विभाग के भी होश उड़ गए। वर्ष 2011-12 में बंदरों ने 2145 हेक्टेयर भूमि पर लगी मक्की, गेहूं और धान की फसल को बर्बाद कर दिया। जिसकी कुल कीमत 877.67 लाख रुपये थी।

कृषि विभाग ने उठाया कदम
कृषि विभाग ने नुकसान के आंकड़े देखने के बाद किसानों को बंदर प्रभावित इलाकों में अदरक, हल्दी और भिंडी की खेती करने के लिए प्रेरित करना शुरू किया है। विभाग ने बंदर प्रभावित कृषि इलाकों में किसानों को 450 क्विंटल हल्दी, 100 क्विंटल अदरक और पांच क्विंटल भिंडी के बीज वितरित किए हैं। कृषि अधिकारियों का कहना है कि इनकी खेती से किसानों को धान, मक्का और गेहूं से कहीं अधिक दाम मिलेंगे।

विभाग हुआ गंभीर
चीफ एग्रीकल्चर आफिसर केएस संब्याल ने बताया कि बंदरों की समस्या को वाइल्ड लाइफ विभाग के अधिकारियों के ध्यान में लाया गया है, लेकिन उनकी तरफ से समस्या के समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग अदरक, हल्दी व भिंडी की खेती को बढ़ावा देकर अपनी तरफ से समस्या को हल करने का प्रयास कर रहा है। समस्या के हल के लिए प्रशासन को और भी जरूरी कदम उठाने होंगे।

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