जिला में पर्याप्त नहीं है खाद वितरण केंद्र

Udhampur Updated Fri, 27 Jul 2012 12:00 PM IST
उधमपुर। जिला उधमपुर में पर्याप्त खाद वितरण केंद्र नहीं होने के कारण हर वर्ष खरीफ और रबी सीजन में हजारों किसानों को खाद के लिए भटकता पड़ता है। समय पर खाद नहीं मिलने के कारण कई बार किसानों को नुकसान भी झेलना पड़ता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मुनाफा कम होने के कारण व्यापारियों द्वारा खाद वितरण केंद्र खोलने की तरफ रुचि नहीं लेने के कारण ही जिला में पर्याप्त खाद वितरण केंद्र खोले नहीं जा रहे हैं।
यूरिया, डीएपी (डाया) और पोटाश (खाद) फसलों के लिए संजीवनी की तरह है। खरीफ और रबी सीजन में फसलों की बीजाई से पहले और उसके बाद खाद की जरूरत पड़ती है। इस दौरान किसान ज्यादातर चक्कर शहर और ग्रामीण इलाकों में स्थित खाद वितरण केंद्र के लगते हैं। जहां से अकसर किसान खाद नहीं मिलने के कारण निराश होकर लौटते हैं। बार-बार चक्कर काटने के बाद खाद नहीं मिलती तो कई बार इन्हें कृषि विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करने को भी मजबूर होना पड़ता है।
हर पंचायत में हो केंद्र
नियमानुसार जिले के प्रत्येक पंचायत में एक खाद वितरण केंद्र होना चाहिए। जहां समय पर विभाग द्वारा खाद पहुंचाई जाए। किसानों को भी खाद खरीदने के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़े, लेकिन जिला उधमपुर में जरूरत के मुताबिक आधे से भी कम खाद वितरण केंद्र हैं। जिसके कारण किसान परेशानियों का सामना करते हैं। जिला उधमपुर के सात ब्लाक में कुल 204 पंचायतें हैं, लेकिन अभी तक विभाग द्वारा केवल 92 खाद वितरण केंद्र ही खोले जा सके हैं। 112 खाद केंद्रो की कमी है।
बेबस हैं किसान
जिला में खाद केंद्रों की कमी और मौजूद खाद केंद्रों में समय पर खाद नहीं मिलने से किसानों का हर वर्ष नुकसान उठाना पड़ता है। चक्खड़ के चरण दास, कावा के यशपाल, जिब के करतार चंद और अन्य कई किसानों ने बताया कि जिस प्रकार मौसम की बेरुखी से किसान बेबस हैं। खाद नहीं मिलने के कारण उनकी परेशानी दोगुनी हो जाती है। कई बार तो यही परेशानी उनकी मेहनत पर पानी फेर देती है। उन्होंने बताया कि उन्हें कई किलोमीटर का सफर तय कर खाद खरीदने के लिए खाद केंद्र पहुंचना पड़ता है जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।
जिले में मौजूद खाद विक्रय केंद्र
ब्लाक जरूरत कमी
चिनैनी 49 18
उधमपुर 46 15
घोरडी 27 20
रामनगर 24 18
पंचैरी 21 19
डुडू 20 13
मजालता 17 9
आंकड़ाें से स्पष्ट होता है कि किसान खाद खरीदने के लिए कितना परेशान होते होंगे। बिक्री केंद्राें के बन जाने से किसानों को राहत मिलेगी।
चीफ एग्रीकल्चर आफिसर कुलभूषण सिंह संब्याल ने कहा कि खाद बेचने में व्यापारियों को बहुत कम मुनाफा मिलता है जिसके कारण व्यापारी खाद वितरण केंद्र खोलने की तरफ रुचि नहीं लेते हैं और किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने के कारण परेशानियों से जूझना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई युवा खाद वितरण खोलने का इच्छुक हो तो कृषि विभाग से संपर्क कर सकता है। विभाग की तरफ से उसकी हर संभव सहायता की जाएगी।



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