शहरवासियों को फंड की कमी का ‘दंड’

Udhampur Updated Mon, 23 Jul 2012 12:00 PM IST
उधमपुर। जम्मू प्रांत में उधमपुर जम्मू के बाद दूसरा सबसे बड़ा शहर है। उधमपुर शहर अपने आप में खास पहचान रखता है लेकिन, जन सुविधाएं नहीं मिलने के कारण शहरवासियों व शहर पहुंचने वाले पर्यटकों व गांववासियों को हर रोज परेशानियों से जूझना पड़ता है। जब इस बारे में नगर परिषद के अधिकारियों से पूछा जाता है तो उनके द्वारा फंड की कमी का रोना रो दिया जाता है।
उधमपुर शहर में डीसी कार्यालय सहित सभी सरकारी विभागों के मुख्य कार्यालय मौजूद हैं। जहां अपने कार्यों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। शहर पहुंचने पर लोगों को न तो बैठने के लिए पार्क की सुविधा मिलती है और न ही शौचालय की। वाहन के इंतजार के लिए यात्रियों के बैठने के लिए जरूरत के मुताबिक शेड नहीं है जिसके कारण कड़कती धूप और बारिश के दौरान यात्रियों को बाहर खुले में खड़े रहने को मजबूर होना पड़ता है।

आबादी एक लाख यात्री शेड चार
लगभग एक लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में नगर परिषद ने आज तक केवल चार यात्री शेड बनाए गए हैं। दो शेड एमएच चौक के नजदीक है और दो टाउन हाल के नजदीक। चारों शेड की हालत खस्ता है। यहां बैठने के लिए लगाए गए बैंच पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। इसके अलावा एक यात्री शेड में केवल करीब 15 लोग ही बैठ सकते हैं। उधमपुर मुख्य बस अड्डा, सुभाष चौक, सलाथिया चौक, सैलां तालाब मेटाडोर स्टैंड, वीनस चौक, कैप्परी इलाके में आज तक नगर परिषद की तरफ से यात्री शेड का निर्माण नहीं किया गया है। बस अड्डा पर धूप और बारिश से बचने के लिए यात्री टिकट काउंटर के पास खड़ा होने को मजबूर हो जाते हैं। इसके अलावा बाकी स्थानों पर लोगों को दुकानों का सहारा लेना पड़ता है। जहां से कई बार दुकानदारों के विरोध का भी सामना करना पड़ता है।

शौचालयों तक की सुविधा नहीं
लोगों की सुविधा के लिए शहर में आज तक नगर परिषद की तरफ से एक भी शौचालय का निर्माण कार्य नहीं किया गया है। सुलभ शौचालय द्वारा शहर में चार शौचालय बनाए हैं जो कि पर्याप्त नहीं हैं। अमरनाथ यात्रा के दौरान बाहरी राज्य से आने वाले पर्यटकों को भी शहर में शौचालय नहीं मिलने की समस्या से जूझना पड़ता है।
नगर परिषद ने शहर के विभिन्न हिस्सों में दस के करीब यूरिनल प्वाइंट बनाए हैं जिनकी हालत भी खस्ता है। इनकी हालत इतनी ज्यादा खराब है कि इनका इस्तेमाल करना तो दूर इनके पास से होकर गुजरना भी मुश्किल होता है। इस समस्या के समाधान के लिए नगर परिषद ने कोई प्रोजेक्ट भी तैयार नहीं किया है। परिस्थितियों को देखकर यही लगता है कि शहरवासियों को अभी इस सुविधा कई वर्ष इंतजार करना पड़ेगा।

ठहरने के उचित प्रबंध का अभाव
जरूरी कार्यों से शहर पहुंचने वाले गांववासियों और अन्य छोटे शहरों के लोगों के लिए आराम करने के साथ समय व्यतीत करने के लिए उचित स्थान नहीं है। पहले लोग शहीद भगत सिंह पार्क में समय गुजार लेते थे, लेकिन वर्तमान समय में पार्क के अंदर जाने के लिए सुबह और शाम का समय निर्धारित किया गया है। जिसके कारण लोग पार्क में समय व्यतीत नहीं कर पा रहे हैं। अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों के तीमारदारों के लिए रात गुजारने की कोई व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल के पास सराय होने के बावजूद लोगों को इस्तेमाल के लिए नहीं दी जा रही है। जिसके कारण तीमारदार अस्पताल के किसी कोने में या फिर किसी होटल में रात गुजारते हैं।

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