कूड़े को फेंकना नगर परिषद के लिए बनी बड़ी समस्या

Udhampur Updated Sun, 22 Jul 2012 12:00 PM IST
उधमपुर। शहर की एक लाख से ज्यादा आबादी के घरों से करीब 30 टन कूड़ा हर रोज निकलता है। जिसका कूड़ा फेंकने के लिए स्थायी स्थान नहीं होने के कारण नगर परिषद को गांववासियों के विरोध के बावजूद दरसू इलाके में फेंकना पड़ रहा है। कूड़े को बाहर फेंकने के लिए नगर परिषद के पास न तो पर्याप्त सफाई कर्मचारी हैं और न ही पर्याप्त वाहन। जिसके कारण शहर के विभिन्न हिस्सों में हर रोज गंदगी के ढेर देखे जा सकते हैं।
सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों को 17 वार्ड सौंपे गए हैं। जहां से सफाई कर्मचारी हर रोज करीब 30 टन कूड़ा एकत्र करके शहर से करीब 20 किलोमीटर दरसू इलाके में जाकर फेंक रहे हैं। वर्ष पहले नगर परिषद द्वारा गंदगी को दूधरनाला इलाके में फेंका जाता था। यहां विरोध-प्रदर्शन के बाद नगर परिषद ने गंदगी को दरसू इलाके में फेंकना शुरू किया। यहां के लोगों ने भी इसका विरोध किया जा रहा है। वर्तमान में नगर परिषद के लिए कूड़ा निस्तारण जटिल समस्या बन चुकी है।
वर्ष 2008 में सेना ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत कूड़ा निस्तारण के लिए नगर परिषद के साथ मिल कर काम करने का प्रस्ताव तैयार किया था। जिसको डीसी द्वारा मंजूरी भी मिल गई। मलाड़ इलाके में इसके लिए डीसी, नगर परिषद के ईओ और सेना के अधिकारियों ने सात कनाल 16 मरले भूमि का चयन भी कर लिया, लेकिन जब इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के सामने रखा तो उन्होंने सेना के साथ काम करने की मंजूरी नहीं दी और प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।
स्टाफ की कमी भी कारण
स्टाफ की कमी के कारण भी कूड़ा निस्तारण में कई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। एक लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में नगर परिषद के 130 सफाई कर्मचारी सफाई का काम कर रहे हैं। जिसमें 65 स्थायी और 65 अस्थायी कर्मचारी हैं। नप के अधिकारियों के अनुसार, सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कम से कम 250 सफाई कर्मचारियों की जरूरत है। अगर कर्मचारी पूरे हो जाएं तो काफी हद तक समस्या को हल किया जा सकता है।
वाहनों की कमी से समस्या बढ़ी
वाहनों की कमी और खस्ताहाल वाहनों के कारण भी समस्या बढ़ रही है। वर्तमान समय में कूड़ा उठाने के लिए नगर परिषद के पास एक छोटा जेसीबी, एक छोटा और एक बड़ा टिप्पर तथा पांच आटो मौजूद हैं। आटो से गंदगी को जमा किया जाता है और फिर उसे टिप्पर में भर कर दरसू इलाके में फेंका जाता है। मौजूद वाहन पूरी गंदगी को उठाने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए हर रोज शहर के विभिन्न हिस्सों में गंदगी के ढेर लगे देखे जा सकते हैं।
कूड़ा निस्तारण के लिए प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेज दिया गया है। सोमवार को जिला की बोर्ड मीटिंग में प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है। कूड़ा फेंकने के प्रोजेक्ट के लिए बिरमा पुल इलाके में 20 कनाल भूमि का चयन कर लिया गया है। खाली पड़े 80 पदों को भरने के लिए सरकर की तरफ से मंजूरी मिल गई थी, लेकिन भर्ती प्रक्रिया का विरोध करते हुए सफाई कर्मचारी यूनियन ने इसका स्टे आर्डर हासिल कर लिया है। वाहनों की कमी को दूर करने के लिए सरकार से तीन टिप्परों की मांग की गई है। रवि कुमार, ईओ, म्यूनिसिपल कमेटी, उधमपुर

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