पाकिस्तानी साजिशों का संग्रहालय बनेगा

Jammu and Kashmir Bureauजम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Fri, 23 Oct 2020 02:17 AM IST
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श्रीनगर। कश्मीर के लोगों के खिलाफ 22 अक्तूबर 1947 की पाकिस्तानी हकूमत की साजिश के बारे में जानकारी देने वाला एक संग्रहालय बनेगा। इसमें पाकिस्तान की निर्दयता को इतिहास के जरिये दर्शाया जाएगा। यह बात मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर के सचिव राघवेंद्र सिंह ने वीरवार को यहां कही।
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श्रीनगर के एसकेआईसीसी में शुरू हुई दो दिवसीय संगोष्ठी और प्रदर्शनी में 73 साल बाद पाकिस्तान के हमले की हकीकत से लोग रूबरू हुए। प्रदर्शनी में उस इतिहास को लोगों के सामने रखा गया, जिनसे वे अभी तक अंजान थे। 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तानी हकूमत ने साजिश के तहत हमला किया था। नेशनल म्यूजियम इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स कंजर्वेशन एंड म्यूजियोलोजी नई दिल्ली द्वारा आयोजित संगोष्ठी और प्रदर्शनी को युवाओं और स्थानीय लोगों ने सराहा। उन्होंने कहा, ऐसे जागरूकता के कार्यक्रम भविष्य में भी होने चाहिएं।
सांस्कृतिक मंत्रालय के सचिव राघवेंद्र सिंह ने बताया कि 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तानी हकूमत ने साजिश के तहत कश्मीर पर हमला किया था। तब ब्रिगेडियर अकबर खान ने ऑपरेशन की अगुवाई की थी। इस हमले में दोमेल और उड़ी में हजारों हिंदू, सिख और मुसलमान मारे गए थे। इस इतिहास को हमने यहां दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि जैसे जर्मनी में लोग होलोकास्ट को याद करते हैं, वैसे ही हमें यह दिन याद रखने और महसूस करने की जरूरत है, ताकि इसे हम समझें और आगे ऐसा न हो उसके लिए तैयार रहें। राघवेंद्र सिंह ने कहा कि इस संगोष्ठी और प्रदर्शनी का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे भी बड़ा यहां एक म्यूजियम बनाया जाएगा। इसके लिए प्रदेश प्रशासन से बात कर ली है।
‘27 नहीं 22 अक्तूबर का दिन ब्लैक डे है’
वहीं कार्यक्रम में पहुंचे सोशल एक्टिविस्ट चौधरी मोहम्मद असलम ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने से पहले जितने भी कार्यक्रम यहां हुए, उनमें से अधिकतर में पाकिस्तान को प्रोत्साहित किया जाता था। यहां के युवाओं ने भी माना कि वह इस इतिहास से बेखबर थे और झूठे प्रचार के जरिये यहां कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया गया जिससे यहां खून खराबा हुआ। उन्होंने कहा कि उम्मीद करते हैं, आने वाली पीढ़ियां इससे सबक सीखेंगी। उन्होंने कहा कि 22 अक्तूबर का दिन ब्लैक डे है क्योंकि इस दिन यहां के लोगों के साथ जुल्म हुआ था और जो 27 अक्तूबर को अलगाववादियों द्वारा मनाया जाता रहा है वो ब्लैक डे नहीं है बल्कि उस दिन सेना हमारी हिफाजत के लिए यहां बुलाई गई थीं। आज यह एतिहासिक कदम पाकिस्तान के मुंह पर करारा तमाचा है।
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