श्रीनगर में आज राष्ट्रीय संगोष्ठी

Jammu and Kashmir Bureauजम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Thu, 22 Oct 2020 02:38 AM IST
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में बदलाव का असर अब जमीन पर भी नजर आ रहा है। प्रदेश में पहली बार 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तन समर्थित कबाइलियों के हमले की स्मृति में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन वीरवार से किया जा रहा है। इस संगोष्ठी में केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल, जम्मू-कशमीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, शिक्षाविद, सेना एवं वायुसेना के पूर्व अधिकारी तथा रक्ष विशेषज्ञों सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। 73 वर्ष पहले इसी दिन पाकिस्तान समर्थित कबाइलियों के तत्कालीन जम्मू-कश्मीर पर हुए हमले को नाकाम करने के लिए भारतीय सेना को हवाई मार्ग से कश्मीर घाटी पहुंचाया गया था। जिसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरु हुआ था।
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अधिकारियों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार और राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान कला इतिहासए संरक्षण एवं संग्रहालय विज्ञान द्वारा एसकेआईसीसी में आयोजित इस संगोष्ठी में शामिल होने वाले सभी वक्ता हमले की ऐतिहासिक कथा को सामने लाएंगे। एक अधिकारी ने कहा, संगोष्ठी द्वारा प्रस्तावित विषय पर भविष्य की प्रदर्शनी
संग्रहालय के आकार और आकृति को रेखांकित करना प्रस्तावित है।
इस तरह की पहल का उद्देश्य इतिहास के इस चरण के बारे में लोगों में जागरूकता लाना होगा। इस कार्यक्रम से कश्मीर की आवाम को विशेष तौर पर याद करने में मदद मिलेगी कि स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद देश ने पहली लड़ाई कैसे लड़ी थी।
एक अधिकारी ने कहा कि आक्रमणकारियों की हिंसा और अत्याचार को याद करना और इस चुनौती पर काबू पाने में दिखाई गई वीरता उन लोगों के लिए एक श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने स्वतंत्र भारत की पहली लड़ाई में अपना जीवन न्योछावर किया था। यह प्रदर्शनी या स्मारक अपने तरह का पहला होगा।
हमले में हुई व्यापक बर्बरता
22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला किया था जिस दौरान बड़े पैमाने पर लूट और बर्बरता हुई थी। हजारों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को निर्दयता से मार डाला गया था। 26 अक्टूबर 1947 को तत्कालीन डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के समझौते पर हस्ताक्षर किये थे जिसके बाद भारतीय सैनिकों को कबायली आक्रमणकारियों को पीछे धकेलने के लिए श्रीनगर पहुंचाया गया था।
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