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Kashmir: हंदवाड़ा में 33 साल के बाद प्राचीन गणेश मंदिर में फिर सुनाई दीं घंटियों की गूंज

अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Tue, 04 Oct 2022 09:07 AM IST
सार

आतंकवाद के दौर में यहां की मूर्तियां खंडित कर दीं और मंदिर को जला दिया गया था। अब सनातन धर्म सभा हंदवाड़ा और अपनी बिरादरी ने इस मंदिर की इस वर्ष मरम्मत करवाई। मरम्मत के बाद यहां मूर्तियों की स्थापना की गई।

Handwara Temple
Handwara Temple - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा के राजधान मोहल्ले में प्राचीन गणेश मंदिर में 33 वर्षों के बाद एक बार फिर से घंटियों की गूंज सुनाई दी। सनातन धर्म सभा हंदवाड़ा के योगदान और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के सहयोग से मंदिर की मरम्मत और मूर्तियों की स्थापना की गई।


सनातन धर्म सभा हंदवाड़ा के अध्यक्ष अशोक कुमार काव ने कहा कि यह मंदिर सदियों पुराना प्राचीन मंदिर है। आतंकवाद के दौर में यहां की मूर्तियां खंडित कर दीं और मंदिर को जला दिया गया था। अब सनातन धर्म सभा हंदवाड़ा और अपनी बिरादरी ने इस मंदिर की इस वर्ष मरम्मत करवाई। मरम्मत के बाद यहां मूर्तियों की स्थापना की गई। काव ने बताया कि आज माता भद्रकाली की यात्रा जिले में आई तो उनके मन में आया कि इस मंदिर में दर्शन करें। यहां आकर पूजा अर्चना की। उन्होंने कहा कि इस मंदिर के साथ हमारी आस्था जुड़ी हुई है। 


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एक अन्य कश्मीरी पंडित ने कहा, आज भी यहां कश्मीरी भाईचारा कायम है। मरम्मत कार्यों के दौरान वह यहां अकेले होते थे लेकिन यहां की मुस्लिम बिरादरी ने उनका बहुत साथ दिया। मंदिर के बाहर एक कुआं भी है जिसकी साफ़ सफाई मुस्लिम भाइयों ने की और उसके पैसे भी नहीं लिए। उन्होंने कहा कि कोई दिक्कत नहीं आने दी। उन्होंने हर चीज मुहैया कराई। उन्होंने बताया कि शुरू से यहां एक रिवायत चलती आई है कि स्थानीय कश्मीरी मुस्लिम हर शुक्रवार तेहरी (रिवायती पुलाव) का चढ़ावा यहां चढ़ाते थे जो आज भी कायम है। उन्होंने बताया कि 4 मार्च 1990 को यहां आखरी पूजा हुई थी और 33 वर्षों के बाद एक बार फिर यहां पूजा हुई।

इस बीच स्थानीय मुस्लिम मौलवी गुलाम मोहिउद्दीन ने कहा कि हमने अपने बड़ों से सुना था कि हर धर्म के लोग एक साथ मिलकर रहते थे। पिछले ढाई महीने से हमारे कश्मीरी पंडित भाई यहां मरम्मत का काम कर रहे थे और हमारी कोशिश यही रही कि इन्हें किसी तरह की दिक्कत न आने दें। उन्होंने कहा कि हमारा यही पैगाम रहेगा कि जो भाईचारा पहले यहां था वो वैसे ही कायम रहे। उन्होंने यह भी कहा कि करीब तीन दशकों से अधिक समय बाद मंदिर के खुलने से हम बेहद खुश हैं और हम चाहते हैं कि जो लोग यहां से पलायन कर गए वो वापस अपने घरों में लौटें ताकि जो वक़्त हमने एक साथ बिताया था वो दौर दोबारा से अनुभव करने का मौका हमारे बच्चों को भी मिले।

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