दूरदराज क्षेत्रों के पंच-सरपंच खुशी में नहीं हो पाए शरीक

Sri nagar Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
श्रीनगर। 1974 के बाद राज्य के चार नेताओं को ऊपरी सदन का रास्ता दिखाने वाले पंच-सरपंच आज भी जीत की खुशी से नदारद रहे। राज्य के 33540 पंचों-सरपंचों की बदौलत ही आज चार लोग विधान परिषद का सदस्य बनने में सफल हुए हैं।
सोमवार को 95 प्रतिशत से भी अधिक पंचों-सरपंचों ने इस चुनाव में भाग लेकर भारतीय लोकतंत्र में अपनी आस्था व्यक्त की थी। आतंकवादियों द्वारा चुनावों से दूर रहने की धमकी तथा गत करीब दो वर्षों से सरकार द्वारा पंचायतों को सशक्त करने के खोखले दावों के बावजूद इन लोगों ने अपनी जान हथेली पर रख कर मतदान में भाग लेने का रास्ता ही चुना। इनके सहारे दो उम्मीदवारों की जीत के बाद जो खुशी के लहर उठी वह श्रीनगर शहर अथवा कुछ कसबों तक ही सीमित दिखी। पंच-सरपंच इस खुशी से काफी दूर दिखाई दिए। दूरदराज के इलाकों में रह रहे पंच-सरपंच अपने पसंदीदा उम्मीदवार की जीत पर मन ही मन खुश तो हुए, लेकिन इसको जाहिर करने का साहस वे नहीं जुटा पाए। इसका कारण भारी तादाद में इनके चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने के बाद आतंकी बदले का डर बताया गया है। यही कारण है कि इनकी बदौलत विजय रहे अपने नेताओं की खुशी में भी यह लोग शामिल नहीं हुए।
सोमवार को मतदान के दौरान बारामूला जिले के पट्टन तथा सिंघपोरा ब्लाकों का दौरा करने वाले इस पत्रकार को सरपंचों ने अपना नाम तक बताने से मना कर दिया था। उन्होंने केवल इतना कहा था कि हमने अपना काम कर दिया, अब जो करना है, सरकार ने करना है। श्रीनगर शहर से दूर कई जिला मुख्यालयों तथा कसबों से उम्मीदवारों की जीत पर खुशी मनाए जाने की सूचनाएं तो अवश्य प्राप्त हुई हैं, लेकिन इनमें शामिल लोग पंच-सरपंच कम दलों के कार्यकर्ता अधिक बताए गए हैं।

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