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पुराणों की वितस्ता नदी ढो रही गंदगी

Sri nagar

Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। वेदों और पुराणों की वितस्ता और आज की झेलम नदी के दोनों किनारों पर बसी घाटी के लोग की जिंदगी नदी के पानी पर टिकी है, लेकिन शायद सरकार के साथ-साथ आम लोग भी इस बात को भूल चुके हैं। एक जमाने में इसी नदी का पानी लोग अपने घरों में पीने के लिए ले जाते थे, लेकिन आज हालत यह है कि नदी के पानी से हाथ भी नहीं धोए जा सकते। वितस्ता में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए अभी तक कोई अभियान भी नजर नहीं आ रहा। ठंड के मौसम से नदी का पानी पहले ही कम हो चुका है। दूसरी ओर शहर की सारी सीवरेज की गंदगी नदी की ओर मोड़ दी गई है। हालत यह है कि बाजारों से उठाई गई गंदगी भी नदी में फेंकी जा रही है। कश्मीर सिटीजन फोरम के चेयरमैन जरीफ अहमद जरीफ के मुताबिक कश्मीर घाटी वितस्ता यानी झेलम के दोनों किनारों पर बसाई गई है। यहां की जिंदगी हजारों वर्षों से इसी नदी के दोनों किनारों पर आबाद है और यह नदी यहां की खूबसूरती, पर्यावरण, यहां की फसलों और आम जनजीवन को आगे चलाने में अपना किरदार निभाती आई है। जरीफ के मुताबिक घाटी में राजा ललिता दित्ता के जमाने में नदी का पूजन होता था, क्योंकि नदी के बारे में वेदों और पुरानों में बखान हुआ है। पवित्र नदी के किनारों पर लोग पूजा के अलावा खनाबल से खादिनयार तक पूजा के दीये जलाते थे। जरीफ अहमद जरीफ का कहना है कि पवित्र नदी ने सैकड़ों बार पूरी घाटी के पाप धोये हैं। कश्मीर के किसी भी दौर में नदी की पवित्रता के साथ खिलवाड़ नहीं हुआ, लेकिन 1947 के बाद ही नदी की हालत खराब होती गई। पहले किनारों पर नाजायज अतिक्रमण हुआ और उसके बाद दोनों किनारों पर सीमेंट का जंगल बनता गया।
आज यह नदी गंदे नाले की शकल ले चुकी है और चारों ओर नदी में शहर की पूरी गंदगी डाली जा रही है, जिससे नदी का पानी अब जहरीला हो चुका है। न सरकार और न ही लोगों को नदी की पवित्रता का अब कोई खयाल है। सरकार सिर्फ इस नदी पर पुल बनाती जा रही है, ताकि बचे क्षेत्रों का भी बाजारीकरण हो। नदी की सफाई और इसकी पवित्रता को बचाने का कोई प्लान सरकार के पास नहीं। इसकी वजह से नदी पूरी तरह से अपनी पवित्रता खो चुकी है। इस बारे में श्रीनगर नगर निगम खामोश तमाशाई बना हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक नदी का पानी बुरी तरह से गंदगी से प्रभावित है और पूरी घाटी की फसलों को लहलाने में अपना रोल निभाती यह पवित्र नदी रोज बदहाल होती जा रही है।
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