चौरंडा गांव में कम नहीं हुई दहशत

Sri nagar Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। भारत-पाक नियंत्रण रेखा के उड़ी सेक्टर में गत दिवस पाक सेना द्वारा दागे गए गोलों के बाद ग्रामीणों में गहराई दहशत का माहौल अभी दूर नहीं हुआ है। इसका कारण पाक सेना द्वारा हल्के हथियारों से रुक-रुक कर गोलीबारी जारी रखना बताया गया है। पिछले तीन दिनों में भी पाकिस्तानी सेना और रेंजरों ने चार दफा सीज फायर का उल्लंघन कर भारतीय ठिकानों को निशाना बनाया है।
दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम संधि का उल्लंघन कर पाक सैनिकों ने गत मंगलवार सुबह भारतीय नागरिक ठिकानों, जिनमें चौरंडा गांव सबसे अधिक प्रभावित रहा, पर कई राकेट दागे थे। इस हमले में एक युवती सहित तीन ग्रामीण मारे गए थे और कुछ माल मवेशी भी घायल हुए थे ।
घटना के तीन दिन बाद भी हमले से इलाके में फैली दहशत में कोई कमी नहीं आई है। इसका कारण स्थानीय लोग सीमापार की गोलीबारी का पूरी तरह न रुकना बता रहे हैं। चौरंडा गांव के स्थानीय निवासी आशिक हुसैन का कहना है कि वीरवार को भी पाक सैनिकों ने उनके गांव पर गोलीबारी की, लेकिन इसमें कोई घायल तो नहीं हुआ, लेकिन यह खतरा उनके सिरों से अभी समाप्त नहीं हुआ है। गोलीबारी का कारण यह लोग सीमापर भारतीय बंकरों का निर्माण करना बताते हैं। इसको लेकर गांववासी उड़ी कस्बे में प्रदर्शन कर विरोध भी जता चुके हैं। उनका कहना है कि सेना की इस कार्रवाई ने उनकी जान सांसत में डाल दी है, जबकि सेना पाकिस्तान की इस हरकत का कारण भारतीय सेना को गोलीबारी के लिए उकसाना मात्र बता रही है।
सेना प्रवक्ता जेएस बरार पाक सेना द्वारा जम्मू-कश्मीर के साथ लगती भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी का कारण घुसपैठ करवाना मात्र बताते हैं। वह कहते हैं कि बर्फबारी से पूर्व वे उग्रवादियों को इस ओर धकेलना चाहते हैं और अधिकांश सीमा रेखा के घुसपैठ के परंपरागत रास्तों को पूरी तरह सील कर दिए जाने के कारण पाक सेना कश्मीर संभाग के उड़ी तथा जम्मू संभाग के पुंछ जिले के मेंढर सेक्टर से यह प्रयास बार-बार कर रहे, लेकिन दोनों ही स्थानों पर असफलता हाथ लगने के कारण पाक सैनिक मासूम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।
इस बीच सरकार ने बारामूला के जिला विकास आयुक्त को पाक सेना के हमले में हुए जानमाल के नुकसान का जायजा लेकर एक रिपोर्ट सरकार को भेजने के लिए कहा है, ताकि प्रभावित ग्रामीणों को तुरंत राहत राशि मुहैया करवाई जा सके। बारामूला के जिला विकास आयुक्त जीए ख्वाजा ने बताया कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने उड़ी का दौरा कर वहां से एसडीएम तथा तहसीलदार को मौके पर जाकर जानमाल के नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट उनको सौंपने के लिए कहा है। जैसे ही यह रिपोर्ट उनके पास आएगी, हमले में मारे गए नागरिकों तथा नुकसान के लिए अनुग्रह राशि उनको मुहैया करवा दी जाएगी।
पाक सेना के हमले के बाद सुर्खियों में आया चौरंडा गांव दरअसल वर्ष 2005 में भी समाचार पत्रों में सुर्खियां बटोर चुका है। यह सीमांत गांव 2005 में आए विनाशकारी भूकंप में भी बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इस गांव का हवाई फासला उड़ी कस्बे से पांच किमी है, लेकिन पहाड़ी पर स्थित होने के कारण सड़क मार्ग से इसकी दूरी 20 किमी है। गांव सीमा पर की गई तारबंदी के उस पार है और यहां पहुंचने के लिए चार किमी पैदल रास्ता भी तय करना पड़ता है।

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